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भारत में साइबर अपराधियों ने एक नया और चौंकाने वाला तरीका अपनाया है, जो डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट/ट्रेडिंग फ्रॉड से अलग है। इस ट्रेंड में वरिष्ठ नागरिकों को भावनात्मक रूप से फंसाकर उनकी जीवनभर की बचत हड़प ली जा रही है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिक खतरे में!
साइबर अपराधी खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर बुजुर्गों को “लाइफटाइम फ्री सीनियर सिटिजन पेंशन कार्ड” देने का लालच दे रहे हैं।
- व्हाट्सऐप पर लिंक भेजकर उन्हें फर्जी APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।
- यह ऐप मोबाइल बैंकिंग पर रिमोट एक्सेस हासिल कर लेता है।
- कुछ ही मिनटों में अपराधी पीड़ितों की जीवनभर की बचत साफ कर देते हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
- संपर्क: अपराधी बैंक अधिकारी बनकर कॉल/मैसेज करते हैं।
- लालच: “फ्री पेंशन कार्ड” का वादा।
- जाल: व्हाट्सऐप लिंक से नकली APK डाउनलोड।
- कब्ज़ा: ऐप से मोबाइल बैंकिंग पर रिमोट कंट्रोल।
- नुकसान: पेंशन और फिक्स्ड डिपॉजिट की पूरी रकम गायब।
सुरक्षा उपाय
- व्हाट्सऐप या अनजान लिंक से कभी भी APK डाउनलोड न करें।
- बैंक कभी भी पेंशन कार्ड व्हाट्सऐप से जारी नहीं करते।
- सभी बैंकिंग ऐप पर दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) सक्षम करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करें।
अतिरिक्त तथ्य
- ज्यादातर पीड़ित: वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक आयु)
- नुकसान: एक मामले में अधिकतम ₹6 लाख की हानि दर्ज हुई
- नया तरीका: अपराधी सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और डेटिंग प्लेटफॉर्म पर नकली पहचान बनाकर बुजुर्गों को भावनात्मक जाल में फंसाते हैं।
- उदाहरण: एक सेवानिवृत्त अधिकारी को फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप में शामिल कर ₹96 लाख का नुकसान कराया गया।
प्रभाव
- आर्थिक: पेंशन और फिक्स्ड डिपॉजिट पर निर्भर बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित।
- मानसिक: डर, शर्मिंदगी और दोबारा शिकार बनने का खतरा।
- परिवार की भूमिका: कई बार परिवार देर से पता लगाता है, जब बड़ी रकम निकल चुकी होती है।
जरूरी कदम
- हेल्पलाइन 1930: तुरंत शिकायत करने पर “गोल्डन आवर” में ट्रांजैक्शन रोका जा सकता है।
- जागरूकता अभियान: स्थानीय भाषाओं में साइबर सुरक्षा शिक्षा।
- बैंक सतर्कता: संदिग्ध RTGS/NEFT ट्रांसफर रोकने में बैंक स्टाफ की भूमिका अहम।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (NCRP): 2025 में 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज।
सुझाव
वरिष्ठ नागरिकों के लिए
- अनजान कॉल/मैसेज पर भरोसा न करें।
- निवेश से पहले SEBI से प्लेटफॉर्म की पुष्टि करें।
- तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें।
परिवार के लिए
- बुजुर्गों की डिजिटल गतिविधि और बैंक ट्रांजैक्शन पर नजर रखें।
- खुलकर बातचीत करें ताकि वे संकोच न करें।
यह नया ट्रेंड बुजुर्गों की भावनाओं और भरोसे का फायदा उठाकर उनकी जीवनभर की बचत छीन रहा है। जागरूकता, सतर्कता और त्वरित रिपोर्टिंग ही सबसे बड़ा बचाव है।
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