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संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स और साइबर धोखाधड़ी लेनदेन पर 60 दिन की अस्थायी डेबिट रोक, लागू होने की तिथि 1 अप्रैल 2027। ड्राफ्ट पर टिप्पणियाँ 2 अक्टूबर 2026 तक आमंत्रित।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक ड्राफ्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिसके तहत बैंकों को संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स और साइबर धोखाधड़ी लेनदेन पर 60 दिन की अस्थायी डेबिट रोक लगानी होगी। ग्राहकों को लेनदेन का औचित्य साबित करने के लिए 20 दिन मिलेंगे, अन्यथा बैंक को मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुँचाना होगा।
RBI के नए SOP की मुख्य बातें
- तत्काल डेबिट रोक: संदिग्ध म्यूल गतिविधि (≥ ₹1,000) पर बैंक तुरंत लेन-देन/खाते फ्रीज़ करेंगे।
- ग्राहक सूचना: ग्राहकों को रोक, कारण और शिकायत निवारण चैनल की जानकारी दी जाएगी।
- प्रतिक्रिया अवधि: ग्राहकों को स्पष्टीकरण हेतु 20 दिन मिलेंगे; बैंक को उत्तर मिलने के बाद 10 दिन में निर्णय लेना होगा।
- एस्केलेशन: यदि संतोषजनक उत्तर न मिले तो बैंक को मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP-CFCFRMS) पर पुलिस को भेजना होगा।
- अधिकतम अवधि: रोक 60 दिन से अधिक नहीं होगी, जब तक कानून प्रवर्तन एजेंसी निर्देश न दे।
- खाता-स्तरीय रोक: केवल असाधारण मामलों में लागू होगी।
बैंकों की ज़िम्मेदारियाँ
- आंतरिक नीतियाँ: AI/ML निगरानी उपकरणों से म्यूल लेन-देन पहचानने के स्पष्ट मानदंड तय करें।
- संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (STRs): FIU-IND को अनिवार्य रूप से दाखिल करें; असफलता KYC अनुपालन उल्लंघन मानी जाएगी।
- रिकॉर्ड संधारण: डेबिट रोक का केंद्रीकृत रिकॉर्ड खाता बंद होने के बाद 5–10 वर्ष तक रखा जाएगा।
- शिकायत निवारण: नामित नोडल अधिकारी; शिकायतें 30 दिन में सुलझानी होंगी।
- उन्नत निगरानी: रोक लगे खातों और उनसे जुड़े खातों पर विशेष निगरानी।
कानूनी एवं नियामक संदर्भ
- सुप्रीम कोर्ट निर्देश (4 अगस्त 2026): RBI को साइबर धोखाधड़ी मामलों में डेबिट रोक SOP बनाने का आदेश।
- सार्वजनिक परामर्श: मसौदा टिप्पणियों हेतु 2 अक्टूबर 2026 तक खुला।
- प्रभावी तिथि: 1 अप्रैल 2027।
हितधारकों पर प्रभाव
नागरिकों के लिए
- जागरूकता: बैंक खाते किराए पर देना या साझा करना अवैध है, इससे डेबिट रोक लग सकती है।
- सावधानी: संदिग्ध गतिविधि तुरंत रिपोर्ट करें; घोषित प्रोफ़ाइल से असंगत लेन-देन से बचें।
बैंकों के लिए
- अनुपालन बोझ: निगरानी प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र और रिपोर्टिंग संरचना को उन्नत करना होगा।
- संचालन चुनौती: धोखाधड़ी रोकथाम और ग्राहक सुविधा में संतुलन।
कानून प्रवर्तन के लिए
- समन्वय: NCRP-CFCFRMS से जुड़ाव तेज़ एस्केलेशन सुनिश्चित करेगा।
- साक्ष्य श्रृंखला: केंद्रीकृत रिकॉर्ड जांच और अभियोजन में सहायक।
जोखिम एवं चुनौतियाँ
- ग्राहक कठिनाई: यदि गलत तरीके से चिन्हित किया गया तो वास्तविक उपयोगकर्ताओं को अस्थायी असुविधा।
- तकनीकी निर्भरता: AI/ML निगरानी पर निर्भरता, गलत पहचान से बचने हेतु मज़बूत कैलिब्रेशन आवश्यक।
- क्रियान्वयन अंतराल: अप्रैल 2027 से पहले बैंकों को सिस्टम और स्टाफ तैयार करना होगा।
RBI का 60-दिन डेबिट रोक SOP साइबर धोखाधड़ी को बढ़ावा देने वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह वित्तीय सुरक्षा मज़बूत करता है, बैंक जवाबदेही लागू करता है, और कानून प्रवर्तन समन्वय सुनिश्चित करता है। इसकी सफलता सटीक निगरानी उपकरणों, जन-जागरूकता, और तेज़ शिकायत निवारण पर निर्भर करेगी।
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Key Takeaways
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