TRAI की AI-आधारित स्पैम ब्लॉकिंग योजना पर टेलीकॉम कंपनियों का विरोध: तथ्य और वास्तविकता

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TRAI की AI-आधारित स्पैम ब्लॉकिंग योजना पर टेलीकॉम कंपनियों का विरोध: तथ्य और वास्तविकता

टेलीकॉम ऑपरेटर TRAI की नई योजना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें AI सिस्टम द्वारा स्पैम के रूप में चिन्हित मोबाइल नंबरों को स्वतः ब्लॉक किया जाएगा।
लेकिन उनकी आशंकाएँ निराधार हैं:


टेलीकॉम कंपनियों की चिंताएँ

  • False Positives: डर कि AI गलती से असली ग्राहकों को ब्लॉक कर देगा।
  • Customer Disruption: शिकायत के बिना सेवा बाधित होने की आशंका।
  • Operational Burden: छोटे ऑपरेटरों को AI लागू करने में कठिनाई।
  • Due Process: दावा कि ब्लॉकिंग केवल उपभोक्ता शिकायतों पर होनी चाहिए, जबकि स्पैम रिपोर्टिंग बहुत कम है।


क्यों ये चिंताएँ कमजोर हैं

1. AI की सटीकता और सुरक्षा उपाय

  • TRAI की योजना मनमानी नहीं है; इसमें रिस्क स्कोरिंग + मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन शामिल है, जो पारदर्शी तकनीक पर आधारित है। यह रियल-टाइम स्कोर बताता है कि कोई नंबर या लेन-देन कितना संदिग्ध है।
  • फीडबैक लूप से गलत ब्लॉकिंग कम होगी और नंबर जल्दी री-वेरिफाई हो सकते हैं।

2. मौजूदा उदाहरण

  • बैंक और UPI प्लेटफ़ॉर्म पहले से ही AI आधारित रिस्क स्कोरिंग का उपयोग कर रहे हैं।
  • टेलीकॉम कंपनियाँ भी स्वेच्छा से AI का उपयोग करती हैं—तो अनिवार्य उपयोग का विरोध असंगत है।

3. उपभोक्ता सुरक्षा प्राथमिकता

  • स्पैम कॉल और धोखाधड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय सुरक्षा का मुद्दा है।
  • कभी-कभी गलत ब्लॉकिंग की लागत, नागरिकों के बड़े नुकसान से कहीं कम है।

4. संचालन क्षमता

  • बड़े ऑपरेटरों के पास पहले से AI सिस्टम हैं।
  • छोटे ऑपरेटर TRAI के DIP प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ सकते हैं।

5. वैश्विक मानक

  • अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में टेलीकॉम कंपनियों को AI से स्पैम/रोबोकॉल ब्लॉक करना अनिवार्य है।
  • भारत की योजना अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।


टेलीकॉम कंपनियों का विरोध असली तकनीकी कठिनाइयों से अधिक जवाबदेही से बचने जैसा है। वास्तविकता यह है:

  • AI-flagged ब्लॉकिंग धोखाधड़ी रोकने का आवश्यक कदम है।
  • असली ग्राहकों की सुरक्षा के लिए उपाय मौजूद हैं।
  • नागरिकों का विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा, टेलीकॉम कंपनियों की असुविधा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।