तकनीक और जागरूकता के दम पर हरियाणा बना साइबर सुरक्षा का मॉडल

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तकनीक और जागरूकता के दम पर हरियाणा बना साइबर सुरक्षा का मॉडल

हरियाणा ने साइबर अपराध के खिलाफ आक्रामक और तकनीक-आधारित रणनीति अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मामलों की संख्या और वित्तीय नुकसान—दोनों में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में दर्ज 6,054 मामले घटकर 2025–26 (15 फरवरी 2026 तक) में 5,831 रह गए। इसी अवधि में पीड़ितों से ठगे गए धन में भी 36% की कमी आई है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • मामलों में कमी: साइबर अपराध के मामले 6,054 (2024–25) से घटकर 5,831 (2025–26, 15 फरवरी तक) हो गए।
  • वित्तीय नुकसान में कमी: ठगी गई राशि ₹980 करोड़ (2024) से घटकर ₹632 करोड़ (2025) रह गई।
  • धोखाधड़ी मामलों में गिरावट: धोखाधड़ी के मामले 9,804 (2024) से घटकर 6,324 (2025) हो गए।
  • कड़ी कार्रवाई: बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों ने अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया।

हरियाणा की सफलता के प्रमुख कारण

  • समर्पित हेल्पलाइन (1930): 24x7 कॉल सेंटर में 74 प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी तैनात किए गए, जिससे शिकायतों का त्वरित पंजीकरण और ठगी गई राशि को तेजी से ब्लॉक करना संभव हुआ।
  • तकनीक-आधारित कार्रवाई: उन्नत मॉनिटरिंग टूल्स, डिजिटल फॉरेंसिक और एआई-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से धोखाधड़ी के पैटर्न की तेजी से पहचान की गई।
  • निवारक कानूनी उपाय: Zero FIR और Dual OTP Verification जैसी व्यवस्थाओं ने पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत किया और अपराधियों को हतोत्साहित किया।
  • कड़ी गिरफ्तारियां: साइबर अपराध के हॉटस्पॉट्स पर बड़े स्तर पर कार्रवाई कर अपराधियों को स्पष्ट संदेश दिया गया।
  • जन-जागरूकता अभियान: लगातार अभियानों ने नागरिकों को धोखाधड़ी पहचानने और समय पर रिपोर्ट करने के लिए सक्षम बनाया।
  • वित्तीय नुकसान पर नियंत्रण: ₹980 करोड़ (2024) से घटकर ₹632 करोड़ (2025) तक गिरावट—यानी 36% की कमी—इस रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

निष्कर्ष
हरियाणा ने तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया और जन-जागरूकता के समन्वय से एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। यह अनुभव बताता है कि प्रौद्योगिकी-आधारित पुलिसिंग, मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र और जागरूक नागरिक मिलकर साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।