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श्रीलंका में बढ़ता साइबर अपराध नेटवर्क: अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी सिंडिकेट्स का नया केंद्र

श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट्स का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। इसका क्षेत्र अवैध कॉल सेंटर संचालन के माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है। कंबोडिया की तरह, श्रीलंका भी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का केंद्र बनने के खतरे बढ़ रहे हैं।

हाल ही में हुई कार्रवाई ने समस्या की गंभीरता उजागर की। 198 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 173 भारतीय और 25 नेपाली शामिल थे। इन पर वीज़ा का दुरुपयोग, अवैध रोजगार, प्रतिबंधित सामान रखने और विदेशों में पीड़ितों को निशाना बनाने वाले संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में भागीदारी के आरोप लगे।

कार्रवाई से जुड़े मुख्य तथ्य

  • कुल गिरफ्तारियां: 198 विदेशी नागरिक (173 भारतीय, 25 नेपाली)
  • हॉटस्पॉट क्षेत्र: गाले, हिक्काडुवा और मिडिगामा (दक्षिणी रिसॉर्ट क्षेत्र)
  • आयु समूह: मुख्यतः 25–35 वर्ष
  • आरोप:
  • पर्यटक वीज़ा का दुरुपयोग (ओवरस्टे और अवैध रोजगार)
  • ड्यूटी फ्री प्रतिबंधित सामान (सिगरेट) रखना
  • साइबर अपराध गतिविधियाँ (धोखाधड़ी, घोटाले और ऑनलाइन शोषण)
  • प्रवृत्ति: जनवरी 2026 से अब तक श्रीलंका में 628 विदेशी साइबर अपराध के मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

कार्यप्रणाली (Modus Operandi)

  • अल्पकालिक टूरिस्ट परमिट पर श्रीलंका में प्रवेश
  • लैपटॉप और मोबाइल फोन की सहायता से अस्थायी स्कैम सेंटर स्थापित करना
  • ऑनलाइन संचार प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से विदेशों में पीड़ितों को निशाना बनाना
  • गाले में छापेमारी के दौरान 58 कंप्यूटर और 79 मोबाइल फोन बरामद किए गए।

साइबर अपराध संचालन की प्रकृति

प्राधिकरणों के अनुसार ये समूह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स से जुड़े थे, जो श्रीलंका की कनेक्टिविटी और वीज़ा सुविधा का लाभ उठा रहे थे। उनकी गतिविधियों में शामिल थे:

1. ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी
     नकली निवेश प्लेटफ़ॉर्म, ऋण घोटाले और ट्रेडिंग फ्रॉड
2. डिजिटल संचार घोटाले
     अधिकारियों का प्रतिरूपण, “डिजिटल गिरफ्तारी” घोटाले और वीडियो कॉल के माध्यम से वसूली
3. क्रॉस बॉर्डर सिंडिकेट संचालन
     VoIP, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया के माध्यम से भारत और अन्य देशों में पीड़ितों को निशाना बनाना
4. अवैध कॉल सेंटर संचालन
     पर्यटन व्यवसायों की आड़ में संचालित नेटवर्क, जिनका संबंध चीनी और दक्षिण पूर्व एशियाई साइबर गिरोहों से बताया जा रहा है।


जोखिम और निहितार्थ

  • क्षेत्रीय सुरक्षा खतरा: श्रीलंका के अपेक्षाकृत ढीले वीज़ा नियम साइबर अपराध सिंडिकेट्स को आकर्षित कर रहे हैं।
  • भारत की संवेदनशीलता: बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क सक्रिय रूप से भर्ती कर रहे हैं।
  • कानून प्रवर्तन चुनौती: अल्पकालिक वीज़ा धारकों की गुप्त साइबर गतिविधियों की निगरानी करना कठिन बना हुआ है।

सुझाए गए प्रतिविधान

  • भारत–श्रीलंका संयुक्त निगरानी तंत्र के माध्यम से कड़े वीज़ा निरीक्षण
  • भारतीय पुलिस, CERT-In और श्रीलंकाई पुलिस के बीच क्रॉस बॉर्डर साइबर टास्क फोर्स का गठन
  • विदेशी कॉल सेंटर आधारित साइबर घोटालों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए जन जागरूकता अभियान
  • आईटी एक्ट और आईपीसी प्रावधानों के तहत तेज़ प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई
  • यूरोपोल शैली की संयुक्त अंतरराष्ट्रीय जांच टीमों का निर्माण

इन गिरफ्तारियों से स्पष्ट होता है कि भारतीय नागरिक श्रीलंका से संचालित वैश्विक साइबर अपराध सिंडिकेट्स के जाल में फँसते जा रहे हैं। धोखाधड़ी, वसूली और अवैध कॉल सेंटर संचालन जैसी गतिविधियाँ भारत की साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कड़े वीज़ा निरीक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानून प्रवर्तन रणनीति अत्यंत आवश्यक है।

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Key Takeaways

Sources & References

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