सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापनों का बढ़ता जाल: 114 बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी

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सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापनों का बढ़ता जाल: 114 बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी

मध्यवर्गीय लोगों को निशाना बनाते हुए फर्जी विज्ञापन गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यह मामला उल्हासनगर का है, जहाँ ठगों ने इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल कर सस्ते सौदों का लालच दिया और 114 बैंक खातों के ज़रिए पैसे घुमाए। यह दर्शाता है कि फर्जी विज्ञापन अब पूरे देश में साइबर अपराध की महामारी बनते जा रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका:

गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफ़ॉर्म फर्जी विज्ञापनों को बढ़ावा देते हैं क्योंकि इनके विज्ञापन सिस्टम पहुँच और राजस्व को प्राथमिकता देते हैं, न कि सख्त सत्यापन को।

पहचान, सामग्री और टार्गेटिंग जाँच में मौजूद खामियों का ठग फायदा उठाते हैं।

कमजोर जाँच, इन्फ्लुएंसर का दुरुपयोग और एल्गोरिदमिक बढ़ावा इन विज्ञापनों को बेहद असरदार और रोकना मुश्किल बना देता है।

उल्हासनगर केस (महाराष्ट्र):

आरोपी: उल्हासनगर क्राइम ब्रांच ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया।

तरीका:

इंस्टाग्राम पर फर्जी विज्ञापन, जिनमें iPhones, स्मार्टफोन और फर्नीचर बेहद कम दाम पर दिखाए गए।

व्हाट्सऐप चैट में पीड़ितों को पार्सल वीडियो और नकली बारकोड दिखाकर भरोसा दिलाया गया।

डिजिटल भुगतान लिया गया, लेकिन सामान कभी नहीं भेजा गया।

पैमाना:

114 बैंक खातों से जुड़ा नेटवर्क।

देशभर में 75 साइबर अपराध शिकायतों से संबंध।

सबूत: ₹1.20 लाख के मोबाइल फोन जब्त; डिजिटल ट्रेल की फॉरेंसिक जाँच जारी।

विशेषज्ञ राय: प्रो. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि ठग “फर्जी विज्ञापन + नकली डिलीवरी सबूत” का इस्तेमाल कर खरीदारों का भरोसा जीतते हैं।

सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन कैसे पनपते हैं
आसान पहुँच और कमजोर जाँच

  1. कोई भी व्यक्ति विज्ञापन चला सकता है, पारंपरिक मीडिया की तुलना में बहुत कम जाँच होती है।
  2. प्लेटफ़ॉर्म व्यवसाय की वैधता की सख्त जाँच नहीं करते।

इन्फ्लुएंसर और रिटेलर की नकल

  1. ठग इन्फ्लुएंसर की पहचान, रिटेलर लोगो और उत्पाद कैटलॉग कॉपी कर लेते हैं।
  2. पीड़ित भरोसा कर नकली वेबसाइट पर पहुँच जाते हैं।

भ्रामक प्रचार:

  1. इन्फ्लुएंसर अक्सर भुगतान किए गए प्रचार का खुलासा नहीं करते या उत्पाद की खूबियाँ बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।
  2. एल्गोरिदम इन्हें और फैलाते हैं।

एल्गोरिदमिक बढ़ावा

  1. सनसनीखेज़ या भ्रामक विज्ञापन तेजी से फैलते हैं।
  2. ठग इसका फायदा उठाकर अधिकतम पहुँच हासिल करते हैं।

वैश्विक नेटवर्क:

फर्जी विज्ञापन अक्सर सीमा-पार ऑपरेशन होते हैं: पहचान एक देश की, होस्टिंग दूसरे देश में, और पीड़ित दुनिया भर में।

जोखिम और जन सलाह:

फर्जी विज्ञापन मध्यवर्ग को फँसाते हैं: नौकरी या सस्ते सौदों की चाहत का फायदा उठाया जाता है।

सामान्य तरीके:

  1. इंस्टाग्राम/फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापन।
  2. व्हाट्सऐप पर मनाना।
  3. नकली दस्तावेज़, पार्सल वीडियो, बारकोड का इस्तेमाल।
  4. आर्थिक शोषण: पीड़ितों से बार-बार भुगतान करवाया जाता है, जो म्यूल खातों में जाता है।

क्या करना चाहिए:

  1. विज्ञापन की सीधी पुष्टि आधिकारिक एजेंसियों या रिटेलर से करें।
  2. फ्रैंचाइज़ी या डिस्काउंटेड सामान के लिए पहले से भुगतान न करें।
  3. तुरंत रिपोर्ट करें: साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस।
  4. बैंक ऑफ़र, डिस्ट्रीब्यूशन और उत्पाद सौदों की प्रामाणिकता जाँचें।