सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा: भारत सहित 5 देशों के आयु-आधारित प्रतिबंधों की तुलना

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सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा: भारत सहित 5 देशों के आयु-आधारित प्रतिबंधों की तुलना

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ बातचीत में ऑस्ट्रेलिया के Online Safety Amendment Act, 2024 की सराहना की, जिसके तहत 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुँच प्रतिबंधित की गई है।

श्री मोदी ने कहा:

“मैंने आपको ध्यानपूर्वक देखा है, और जिस तरह आपने आईटी और सोशल मीडिया में समाज की सुरक्षा के लिए कानून बनाए और काम किया है, वह दुनिया को प्रेरित कर रहा है।”

भारत वर्तमान में आयु-आधारित सोशल मीडिया प्रतिबंधों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है, जो ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित है। वहीं मलेशिया, इंडोनेशिया और फ्रांस पहले ही सख़्त कानून लागू कर चुके हैं, जिनमें प्लेटफ़ॉर्म को नाबालिगों की पहुँच रोकने या उनकी आयु सत्यापित करने की बाध्यता है। भारत का दृष्टिकोण अभी चर्चा के चरण में है, लेकिन तुलना से स्पष्ट होता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल नियंत्रण को मज़बूत करने की वैश्विक प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही है।

सोशल मीडिया आयु प्रतिबंध: देशों की तुलना
ऑस्ट्रेलिया

  • न्यूनतम आयु: 16 वर्ष से कम प्रतिबंधित
  • कानूनी ढांचा: Online Safety Amendment Act, 2024
  • प्रवर्तन तंत्र: प्लेटफ़ॉर्म को बच्चों की पहचान कर उनकी पहुँच रोकना अनिवार्य
  • मुख्य विशेषताएँ: A$49.5 मिलियन तक जुर्माना; वैश्विक स्तर पर सबसे सख़्त मॉडलों में शामिल

भारत

  • न्यूनतम आयु: विचाराधीन (13–18 वर्ष के लिए चरणबद्ध मॉडल)
  • कानूनी ढांचा: IT Rules, 2021 में संशोधन या नया कानून संभव
  • प्रवर्तन तंत्र: अभी तय नहीं
  • मुख्य विशेषताएँ: आयु समूह के अनुसार अलग-अलग नियम; सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों में संतुलन पर ज़ोर

मलेशिया

  • न्यूनतम आयु: 16 वर्ष से कम प्रतिबंधित
  • कानूनी ढांचा: Online Safety Act, 2025 (ONSA)
  • प्रवर्तन तंत्र: MyKad/MyDigital ID के माध्यम से आयु सत्यापन अनिवार्य
  • मुख्य विशेषताएँ: कड़ी अनुपालन समयसीमा; RM10 मिलियन तक जुर्माना; "Child Safety by Design" दृष्टिकोण

इंडोनेशिया

  • न्यूनतम आयु: 16 वर्ष से कम प्रतिबंधित
  • कानूनी ढांचा: Government Regulation No. 17/2025 (PP TUNAS)
  • प्रवर्तन तंत्र: प्लेटफ़ॉर्म को खाते निष्क्रिय करने का अधिकार/निर्देश; चरणबद्ध लागू
  • मुख्य विशेषताएँ: TikTok, YouTube और Roblox जैसे उच्च जोखिम वाले प्लेटफ़ॉर्म पर विशेष ध्यान; लाखों खाते हटाए गए

फ्रांस

  • न्यूनतम आयु: 15 वर्ष से कम प्रतिबंधित
  • कानूनी ढांचा: जनवरी 2026 का कानून; EU Digital Services Act (DSA) के अनुरूप
  • प्रवर्तन तंत्र: प्लेटफ़ॉर्म के लिए आयु सत्यापन अनिवार्य; EU निगरानी
  • मुख्य विशेषताएँ: दो-स्तरीय प्रणाली — 15 वर्ष से कम प्रतिबंधित, 15–18 वर्ष सीमित पहुँच; शैक्षिक प्लेटफ़ॉर्म को छूट

भारतीय परिप्रेक्ष्य

  • वर्तमान स्थिति: अभी तक कोई राष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं; कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने राज्य-स्तरीय प्रस्ताव दिए हैं।
  • नीति दिशा: केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्लेटफ़ॉर्म से बातचीत की पुष्टि की है; MeitY चरणबद्ध मॉडल पर विचार कर रहा है।
  • कानूनी विकल्प: संसद में नया कानून या IT Rules, 2021 में संशोधन।
  • मुख्य चुनौतियाँ:
  • आयु सत्यापन की सटीकता और उसके दुरुपयोग की संभावना।
  • बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन।
  • सभी प्लेटफ़ॉर्म पर समान और प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना।

प्रमुख अंतर्दृष्टि और जोखिम

  • सत्यापन तकनीक: मलेशिया और इंडोनेशिया राष्ट्रीय डिजिटल आईडी पर निर्भर हैं, जबकि भारत में नाबालिगों के लिए अभी ऐसी एकीकृत प्रणाली उपलब्ध नहीं है।
  • प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेही: सभी देशों ने प्लेटफ़ॉर्म की जिम्मेदारी तय की है; भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • नागरिक स्वतंत्रता: फ्रांस के मॉडल पर EU स्तर पर बहस हुई है; भारत में भी गोपनीयता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर चर्चा संभव है।
  • वैश्विक प्रवृत्ति: मानसिक स्वास्थ्य, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और एल्गोरिदमिक लत जैसी चुनौतियों के कारण आयु-आधारित नियंत्रण की मांग बढ़ रही है।

भारत में क्या होना चाहिए?

  • चरणबद्ध आयु मॉडल (फ्रांस की तरह), ताकि छोटे बच्चों की बेहतर सुरक्षा हो और बड़े किशोरों को नियंत्रित एवं सीमित पहुँच मिले।
  • आधार-लिंक्ड आयु सत्यापन केवल मजबूत गोपनीयता सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ लागू किया जाए।
  • प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेही अनिवार्य बनाई जाए तथा नियमों का पालन न करने पर प्रभावी आर्थिक दंड (मलेशिया मॉडल) लगाया जाए।
  • जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, जिनमें अभिभावकों, स्कूलों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी हो (इंडोनेशिया मॉडल की तरह)।
  • शैक्षिक एवं शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म को छूट दी जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई और सीखने के संसाधनों तक पहुँच प्रभावित न हो।