“ठग अपनी जगह बदल सकते हैं, लेकिन उनकी चालें वही रहती हैं।”
चाहे लखनऊ हो या सूरत, या फिर कंबोडिया, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया के स्कैम हब — साइबर धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली लगभग हमेशा एक जैसी रहती है।
धोखाधड़ी की सीमाएँ बदल सकती हैं, लेकिन उनका खेल वही रहता है।
संदर्भ
सूरत सिटी क्राइम ब्रांच (ऑपरेशन म्यूल हंट) ने ₹2,000 करोड़ से अधिक के एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया, जिसमें 44 म्यूल अकाउंट्स और देशभर से जुड़ी 6,040 शिकायतें सामने आईं।
इसी तरह, लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने भी ऐसे ही निवेश धोखाधड़ी से जुड़े गिरोहों को पकड़ा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ये स्कैम न केवल भारत में बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के स्कैम हब्स से संचालित हो रहे हैं।
कार्यप्रणाली: एक जैसी प्लेबुक
भारत, कंबोडिया, नेपाल और अन्य स्थानों पर ठग लगभग समान तरीके अपनाते हैं—
शेल कंपनियाँ या फर्जी एनजीओ बनाकर धन शोधन किया जाता है।
“पैसा डबल”, “फटाफट लोन” या “गारंटीड मुनाफा” जैसे झूठे वादे।
दूसरों के नाम पर बैंक खाते खोलकर या किराए पर लेकर धन का लेन-देन।
फर्जी ऐप्स, स्क्रीन मिररिंग, OTP चोरी और बैंकिंग ऐप्स में हेरफेर।
धन को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स तक पहुँचाना।
आरोपी कंबोडिया, थाईलैंड और दुबई जैसे देशों से संचालन और समन्वय करते हैं।
प्रभाव का पैमाना
नागरिक जागरूकता संदेश
निष्कर्ष
सूरत से लखनऊ तक, धोखाधड़ी नए चेहरे पहनती है लेकिन वही चाल चलती है—
फर्जी कंपनियाँ, फर्जी वादे, फर्जी ऐप्स।
नुकसान असली होता है, पीड़ित असली होते हैं और खतरा भी वास्तविक है।
सतर्क रहें। जाँच करें। रिपोर्ट करें।
“सीमाएँ बदलती हैं, धोखाधड़ी नहीं — साइबर सुरक्षित रहें।”
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