सिम बाइंडिंग की अनिवार्यता: डिजिटल सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

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सिम बाइंडिंग की अनिवार्यता: डिजिटल सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

सिम बाइंडिंग की अनिवार्यता

  • सिम बाइंडिंग बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र में एक मानक सुरक्षा प्रथा है।
  • दिसंबर 2025 में भारत सरकार ने इसे कम्युनिकेशन ऐप्स (OTT प्लेटफ़ॉर्म) पर भी लागू किया ताकि बढ़ते धोखाधड़ी मामलों पर रोक लगाई जा सके।


क्यों ज़रूरी है?

• धोखाधड़ी कॉल और मैसेज से बढ़ते घोटाले:
o डिजिटल गिरफ्तारी
o क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी
o ई-कॉमर्स फ्रॉड
o सेक्सटॉर्शन

• अनुमानित नुकसान:
o 2025 में ₹19,812 करोड़
o 2024 में ₹22,849.49 करोड़
o 2023 में ₹7,463.2 करोड़
o 2022 में ₹2,290.23 करोड़

• छह वर्षों में कुल नुकसान: ₹52,976 करोड़ (मोबाइल आधारित धोखाधड़ी से)।


मुख्य प्रावधान

  • OTT कम्युनिकेशन ऐप्स के लिए सक्रिय सिम से लिंक होना अनिवार्य।
  • कंपनियों को लागू करने के लिए 90 दिन का समय।
  • वेब सेशन का 6 घंटे बाद ऑटो लॉगआउट।
  • 120 दिन में अनुपालन रिपोर्ट जमा करना आवश्यक।


हितधारकों के दृष्टिकोण
• सरकार (DoT और माननीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया):
o सिम बाइंडिंग से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और गुमनामी खत्म होगी।
o यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ट्रैकिंग में मदद करेगा।

• COAI (सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया):
o इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह OTT खिलाड़ियों की नियामक जवाबदेही की दिशा में कदम है।

• तकनीकी विशेषज्ञ (FaceOff Technologies):
o सिम बाइंडिंग के साथ AI आधारित पहचान सत्यापन (QR वेरिफिकेशन, लाइवनेस डिटेक्शन, डिवाइस फिंगरप्रिंटिंग) धोखाधड़ी रोकने में सहायक होगा।


साइबर सुरक्षा संदर्भ

  • टेलीकम्युनिकेशन साइबर सुरक्षा संशोधन नियम, 2025 के तहत OTT ऐप्स को सक्रिय सिम से लिंक करना अनिवार्य।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (i4C) ने 24 प्रकार के साइबर अपराध चिन्हित किए हैं, जिनमें सिम स्वैप, पहचान चोरी, रैनसमवेयर और जासूसी शामिल हैं।


मुख्य निष्कर्ष

  • भारत में अब OTT कम्युनिकेशन ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग अनिवार्य।
  • पिछले वर्षों में ₹50,000 करोड़ से अधिक का नुकसान रोकने का लक्ष्य।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत ट्रैकिंग क्षमता मिलेगी।
  • 90 दिन में लागू करना और 120 दिन में रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य।