कर्नाटक उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि दूरसंचार कंपनियाँ (Telcos) अपनी लापरवाही से हुए SIM Swap Fraud के लिए नागरिक उत्तरदायित्व वहन करेंगी। अदालत ने BSNL को जिम्मेदार ठहराते हुए एक सहकारी बैंक को ₹55 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है, क्योंकि बिना उचित सत्यापन के डुप्लीकेट सिम जारी किया गया था। यह ऐतिहासिक फैसला तय करता है कि टेलीकॉम कंपनियों को रिप्लेसमेंट सिम जारी करने से पहले पहचान की सख्त जाँच करनी होगी।
अदालत ने कहा:
“दूरसंचार कंपनियाँ (Telcos) डिजिटल पहचान की संरक्षक हैं, जैसे बैंक में तिजोरी के रखवाले। यदि वे लापरवाही से डुप्लीकेट सिम जारी करती हैं, तो वे धोखाधड़ी को सक्षम करती हैं और इसके लिए उत्तरदायित्व वहन करना होगा। डुप्लीकेट सिम जारी करने से पहले सत्यापन केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि करोड़ों खाताधारकों की सुरक्षा का अहम उपाय है।”
केस विवरण
अदालत की मुख्य टिप्पणियाँ
फैसले के निहितार्थ
नागरिकों के लिए जोखिम व सावधानियाँ
यह फैसला साइबर कानून में मील का पत्थर है: मोबाइल सिम सेवा प्रदाता कंपनियाँ अब SIM Swap Fraud में लापरवाही के लिए जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। यह दर्शाता है कि डिजिटल विश्वास टेलीकॉम कंपनियों की सतर्कता पर निर्भर है।
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