संचार साथी ऐप की अनिवार्य स्थापना दूरसंचार धोखाधड़ी पर रोक लगाने, चोरी हुए उपकरणों को ट्रैक करने और नकली IMEI नंबरों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके प्रभाव को एकीकरण, जागरूकता और प्रवर्तन की रणनीतिक रूपरेखा के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
अब हर मोबाइल में होगा साइबर सुरक्षा का सशक्त साथी — संचार साथी ऐप
संचार साथी साइबर सुरक्षा को कैसे मज़बूत करता है
दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा अनिवार्य किया गया संचार साथी ऐप निम्न कार्यों के लिए बनाया गया है:
अधिकतम प्रभाव के लिए रणनीतिक रोडमैप
1. अवसंरचना और एकीकरण (0–3 माह)
2. जन-जागरूकता और प्रशिक्षण (3–6 माह)
3. नीति और प्रवर्तन (6–12 माह)
4. उन्नत विश्लेषण और AI एकीकरण (12–18 माह)
जोखिम एवं समाधान
गोपनीयता चिंताएँ:
कुछ आलोचकों की चिंता है कि ऐप उपयोगकर्ता अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह ऐप पारदर्शिता और न्यूनतम डेटा संग्रह सिद्धांतों पर आधारित है। इस संदर्भ में संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान महत्वपूर्ण है:
“यदि आप इस एप्लिकेशन का उपयोग नहीं करना चाहते हैं, तो पंजीकरण न करें। यह निष्क्रिय रहेगा। यदि आप इसे हटाना चाहते हैं, तो हटा दें… यह तब तक सक्रिय नहीं होगा जब तक आप पंजीकरण नहीं करते।”
DoT का आदेश: 90 दिनों में अनिवार्य लागू
28 नवंबर को जारी आदेश के अनुसार:
निष्कर्ष
संचार साथी ऐप हर नागरिक का साइबर सुरक्षा साथी बनकर धोखाधड़ी से बचाव करेगा और राष्ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा को मज़बूत करेगा।
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