साइबर अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: बिखरे प्रयासों से ठोस व्यवस्था की ओर

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साइबर अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: बिखरे प्रयासों से ठोस व्यवस्था की ओर

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने, IN THE MATTER OF: VICTIMS OF DIGITAL ARREST SCAMS RELATED TO FORGED DOCUMENTS याचिका की सुनवाई करते हुए, यह टिप्पणी की कि डिजिटल धोखाधड़ी में अब तक ₹54,000 करोड़ की लूट हो चुकी है—यह राष्ट्रीय खतरे की घंटी है। न्यायालय ने इसे “सीधी डकैती” कहा, जो इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध अब छिटपुट घटनाओं से आगे बढ़कर एक प्रणालीगत आर्थिक संकट बन चुका है।


न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • बिखरी हुई प्रतिक्रिया विफल रही: अपराधी तेजी से धन स्थानांतरित कर लेते हैं, जबकि बैंक और नियामक धीमी प्रतिक्रिया देते हैं।
  • विश्वास का संकट: नागरिक भरोसे से बैंक में पैसा जमा करते हैं। लापरवाह ऋण, कमजोर धोखाधड़ी पहचान और नाममात्र की सज़ा इस भरोसे को तोड़ रही है।
  • एआई को अग्रिम रक्षा बनाना होगा: अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स केवल औपचारिकता नहीं हों। वेलोसिटी चेक, असामान्य लेनदेन की पहचान और ट्रांज़ैक्शन रोकने की क्षमता अनिवार्य है।
  • पीड़ित मुआवज़ा ढाँचा: न्याय केवल अपराधियों को दंडित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ितों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा भी लौटानी चाहिए।
  • अंतर-एजेंसी समन्वय: आरबीआई, गृह मंत्रालय और प्रवर्तन एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।


क्यों यह महत्वपूर्ण है

  • राज्यों के बजट से बड़ा नुकसान: साइबर अपराध अब सीमित खतरा नहीं, बल्कि शासन की वित्तीय चुनौतियों के बराबर है।
  • आर्थिक स्थिरता दांव पर: यदि इसे रोका नहीं गया तो डिजिटल अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर जनता का विश्वास डगमगा जाएगा।
  • संस्कृति में बदलाव आवश्यक: बैंक केवल लाभ कमाने वाली संस्थाएँ नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के संरक्षक हैं।


आगे का रास्ता

 

  • एकीकृत राष्ट्रीय एसओपी: सभी बैंकों और एजेंसियों में मानकीकृत प्रोटोकॉल तुरंत लागू हों।
  • एआई आधारित रोकथाम: वेलोसिटी चेक, व्यवहार विश्लेषण और ट्रांज़ैक्शन रोकने वाले टूल्स अनिवार्य हों।
  • पारदर्शी जवाबदेही: संदिग्ध बैंकों की सार्वजनिक पहचान और सख्त दंड।
  • पीड़ित-केंद्रित न्याय: नागरिकों के लिए मुआवज़ा ढाँचा तैयार किया जाए।
  • नागरिक सशक्तिकरण: डिजिटल गिरफ्तारी, म्यूल अकाउंट्स और सुरक्षित लेनदेन पर जागरूकता अभियान।

    साइबर अपराध अब छिपा हुआ खतरा नहीं, बल्कि दिन-दहाड़े राष्ट्रीय संपत्ति की लूट है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “डकैती” कहा। अब भारत को बिखरे हुए प्रयासों से आगे बढ़कर ठोस साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनानी होगी, जहाँ एआई टूल्स, एजेंसियों का समन्वय और नागरिक सशक्तिकरण मिलकर हर रुपये की रक्षा करें।