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₹310 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क: ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 ने उजागर की म्यूल अकाउंट्स की सच्चाई

साइबर अपराध अब ओएलएक्स धोखाधड़ी, सेक्सटॉर्शन और नकली कॉल से कहीं आगे निकल चुका है। आज यह बड़े पैमाने पर वित्तीय रैकेट के रूप में सामने आ रहा है, जो बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन में मौजूद कमियों का फायदा उठाता है। ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत गिर सोमनाथ साइबर क्राइम पुलिस की हालिया सफलता इस खतरे के बड़े पैमाने को उजागर करती है।

गुजरात पुलिस (जूनागढ़ रेंज) का ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0

धोखाधड़ी की रकम: ₹310 करोड़ के लेनदेन का खुलासा।

नेतृत्व: जांच का निर्देशन डीआईजीपी राजेंद्रसिंह चुडासमा (जूनागढ़ रेंज) और एसपी जयदीपसिंह जडेजा (गिर सोमनाथ) द्वारा।

काम करने का तरीका (Modus Operandi):

  • बैंक खाते कमीशन पर साइबर अपराधियों को किराए पर दिए गए।
  • ये खाते ‘म्यूल’ के रूप में काम करते हुए अवैध धन को राज्यों के बीच स्थानांतरित करते थे।

शिकायतों का पैमाना: कई राज्यों में दर्ज 290 साइबर धोखाधड़ी मामलों से तार जुड़े मिले।

गिरफ्तारियां: पाँच आरोपी — आकाश पाला, हिरेन राजगोर, आशुतोष ठाकर, अजय दफड़ा, दीपकगिरी अपर्नाथी — गिरफ्तार।

अगले कदम: अन्य खाताधारकों, संचालकों और अंतर-राज्यीय कड़ियों की पहचान के लिए जांच जारी।

म्यूल अकाउंट्स – साइबर धोखाधड़ी की अदृश्य रीढ़

परिभाषा: फर्जी दस्तावेजों से खोले गए या असली खाताधारकों से किराए पर लिए गए बैंक खाते।

कार्य: पीड़ितों से ठगे गए पैसे को निकालने, परतें बदलने (Layering) और धोखाधड़ी नेटवर्क तक पहुँचाने के लिए उपयोग।

निरंतरता: आरबीआई के दिशानिर्देशों और निगरानी प्रणालियों के बावजूद, लगभग सभी बड़ी साइबर धोखाधड़ी में म्यूल अकाउंट्स मुख्य माध्यम बने हुए हैं।

राष्ट्रीय कार्रवाई:

  • राज्य पुलिस, सीबीआई और ईडी म्यूल नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहे हैं।
  • बैंकों पर KYC, लेनदेन निगरानी और रिपोर्टिंग को मजबूत करने का दबाव।

व्यापक प्रभाव

वित्तीय सुरक्षा: म्यूल अकाउंट्स डिजिटल बैंकिंग में भरोसे को कमजोर करते हैं।

कानून प्रवर्तन: विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है।

सार्वजनिक जागरूकता: नागरिकों को समझना होगा कि बैंक खाते किराए पर देना या साझा करना अवैध है और यह सीधे साइबर अपराधियों की मदद करता है।

नीतिगत प्रयास: बैंकों के लिए मजबूत जवाबदेही तंत्र और म्यूल खाताधारकों के लिए कड़े दंड की आवश्यकता है।

आउटरीच संदेश

साइबर धोखाधड़ी अब कोई छोटे पैमाने का धोखा नहीं है—यह म्यूल खातों का फायदा उठाने वाला एक बहु-करोड़ रुपये का संगठित रैकेट है।

नागरिकों के लिए: कभी भी बैंक खाते किराए पर न दें या साझा न करें। संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

बैंकों के लिए: अनुपालन सख्त करें, धोखाधड़ी का पता लगाने की प्रणाली मजबूत करें और ग्राहकों को शिक्षित करें।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए: म्यूल नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आक्रामक कार्रवाई जारी रखें।

“म्यूल न बनें! अपना बैंक खाता किराए पर देना ₹310 करोड़ के साइबर फ्रॉड को बढ़ावा देता है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।”

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Key Takeaways

Sources & References

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