₹30,000 करोड़ के पैन-इंडिया साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ED की बड़ी कार्रवाई, 3 और गिरफ्तार

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₹30,000 करोड़ के पैन-इंडिया साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ED की बड़ी कार्रवाई, 3 और गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) पूरे भारत में फैले ₹30,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच कर रहा है।

यह जांच गोवा के “डिजिटल अरेस्ट” घोटाले से जुड़ी है, जिसमें पीड़ितों को झूठे कानूनी आरोपों के बहाने धन हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।

यह नेटवर्क शेल कंपनियों, नकद जमा, म्यूल अकाउंट्स, हवाला मार्ग और विदेशी मुद्रा चैनलों के माध्यम से अवैध धन शोधन करता था।

हालिया कार्रवाई

  • ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत तीन और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
  • ये गिरफ्तारियां पहले पकड़े गए आरोपियों के साथ जुड़कर संगठित सिंडिकेट के खिलाफ केस को मजबूत करती हैं।
  • आरोपियों पर धन हस्तांतरण में मदद करने, फर्जी कॉर्पोरेट संरचनाएं बनाने और खातों का संचालन करने का आरोप है।

मोडस ऑपरेंडी (कार्यप्रणाली)

  • पीड़ितों से कॉल/संदेश के माध्यम से संपर्क किया गया, जिसमें वे कानून प्रवर्तन या सरकारी अधिकारियों के रूप में प्रतिरूपण करते थे।
  • उन्हें झूठे आरोपों से डराया गया और “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया — ऑनलाइन रहने के लिए मजबूर किया गया जब तक भुगतान न हो जाए।
  • एकत्रित धन को कई शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा चैनलों के माध्यम से भेजा गया, जिससे पहचान मुश्किल हो गई।
  • नकद जमा को विभिन्न खातों में परतदार तरीके से रखा गया ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके और बाद में विदेश भेजा जा सके।

प्रभाव और पैमाना

  • यह नेटवर्क लगभग ₹30,000 करोड़ का है, जो भारत में उजागर किए गए सबसे बड़े साइबर-आर्थिक घोटालों में से एक है।
  • इस घोटाले का पैन-इंडिया विस्तार है और अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों से जुड़ाव पाया गया है।
  • गिरफ्तारियां साइबर अपराध की अंतरराष्ट्रीय प्रकृति को उजागर करती हैं, जो भय और अधिकार का दुरुपयोग कर नागरिकों को ठगते हैं।

ईडी की रणनीति और आगे की कार्रवाई

  • धन के प्रवाह का पता लगाना जारी रहेगा ताकि अंतिम लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
  • शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा लेन-देन की जांच कर अवैध ढांचे को ध्वस्त किया जाएगा।
  • अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर सीमा-पार संबंधों का पता लगाया जाएगा।
  • नागरिकों को “डिजिटल अरेस्ट” घोटालों से बचाने के लिए रोकथाम उपाय और जन-जागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

निष्कर्ष

ये गिरफ्तारियां एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को उजागर और ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ईडी की सक्रिय कार्रवाई यह दर्शाती है कि साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय अपराधों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।