प्रवर्तन निदेशालय (ED) पूरे भारत में फैले ₹30,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच कर रहा है।
यह जांच गोवा के “डिजिटल अरेस्ट” घोटाले से जुड़ी है, जिसमें पीड़ितों को झूठे कानूनी आरोपों के बहाने धन हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।
यह नेटवर्क शेल कंपनियों, नकद जमा, म्यूल अकाउंट्स, हवाला मार्ग और विदेशी मुद्रा चैनलों के माध्यम से अवैध धन शोधन करता था।
हालिया कार्रवाई
मोडस ऑपरेंडी (कार्यप्रणाली)
प्रभाव और पैमाना
ईडी की रणनीति और आगे की कार्रवाई
निष्कर्ष
ये गिरफ्तारियां एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को उजागर और ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ईडी की सक्रिय कार्रवाई यह दर्शाती है कि साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय अपराधों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
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