भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 में डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए बड़े सुधार प्रस्तावित किए हैं। इनमें UPI, ऑटो डेबिट मैंडेट और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) पर सख्त नियम शामिल हैं। इनका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी को रोकना है, जिसके लिए कूलिंग ऑफ पीरियड, मज़बूत ऑथेंटिकेशन और कड़े अनुपालन ढांचे लागू किए जा रहे हैं।
1. UPI ट्रांसफर के लिए कूलिंग ऑफ पीरियड
₹10,000 से अधिक पी2पी लेन देन पर 1 घंटे का विराम प्रस्तावित है। इससे सोशल इंजीनियरिंग स्कैम द्वारा किए गए त्वरित ट्रांसफर रोके जा सकेंगे और पीड़ितों को संदिग्ध भुगतान रद्द करने का अवसर मिलेगा।
2. ई मैंडेट फ्रेमवर्क (Recurring Payments)
ऑटो डेबिट से पहले ग्राहकों को कम से कम 24 घंटे पहले अलर्ट मिलेगा। वन टाइम रजिस्ट्रेशन के लिए अतिरिक्त फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) अनिवार्य होगा और आवर्ती भुगतान पर सीमा तय होगी। इससे पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
3. प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs)
नए निर्देशों में सख्त KYC अनुपालन, लेन देन सीमा और एस्क्रो अकाउंट प्रबंधन शामिल हैं। इससे वॉलेट और प्रीपेड कार्ड का दुरुपयोग कम होगा।
4. NBFC डिजिटल पेमेंट कंट्रोल्स
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली NBFCs को मज़बूत गवर्नेंस, धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन और ऐप सुरक्षा अपनानी होगी। साथ ही ग्राहक जागरूकता और शिकायत निवारण प्रणाली को मज़बूत करना होगा।
अपेक्षित प्रभाव
चुनौतियाँ
RBI के ये सुधार भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। कूलिंग ऑफ पीरियड, मज़बूत ऑथेंटिकेशन, कड़े अनुपालन और उपयोगकर्ता अलर्ट मिलकर साइबर धोखाधड़ी को कम करेंगे। चुनौती यह होगी कि सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखा जाए ताकि नागरिक UPI और अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा बनाए रखें और धोखेबाज़ों के अवसर घटें।
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