रांची में साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़: फर्जी बैंक खातों के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी का नेटवर्क उजागर

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रांची में साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़: फर्जी बैंक खातों के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी का नेटवर्क उजागर

रांची पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है जो किराए के फ्लैट से साइबर अपराध गिरोह चला रहे थे। वे नकली दस्तावेज़ बनाकर फर्जी बैंक खाते खोलते थे, जिन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी में म्यूल अकाउंट्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। छापेमारी में पुलिस ने 50 पासबुक, 26 डेबिट कार्ड, चेकबुक, आधार कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए।

ये अपराध इसलिए संभव हुए क्योंकि सभी ऐप्स या बैंक उन्नत लाइवनेस चेक का उपयोग नहीं करते। कुछ केवल साधारण "पलक झपकाना" या "मुस्कुराना" जैसे संकेतों पर निर्भर रहते हैं, जिन्हें पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो से धोखा दिया जा सकता है। आधुनिक आधार प्रमाणीकरण में लाइवनेस चेक (रक्त प्रवाह/तापमान की पहचान) शामिल है ताकि सिलिकॉन मोल्ड को रोका जा सके। बैंकों को निर्देश दिया जा सकता है कि वे आधार को सीधे UIDAI से सत्यापित करें और सख्ती से लाइवनेस चेक लागू करें।

मामले के मुख्य विवरण

• गिरफ्तारी की तारीख: 28–29 मई 2026
• स्थान: रॉक व्यू अपार्टमेंट, धवन नगर, गोंडा थाना क्षेत्र, रांची
• गिरफ्तार व्यक्ति: 5
• बरामद सामान:

  • 50 पासबुक (अलग-अलग नामों से)
  • 26 डेबिट/एटीएम कार्ड
  • 8 चेकबुक
  • 13 मोबाइल फोन
  • 3 आधार कार्ड

• तरीका: नकली पहचान दस्तावेज़ों से कई बैंक खाते खोले गए, जिन्हें बाद में साइबर धोखाधड़ी लेनदेन में इस्तेमाल किया गया।

कार्यप्रणाली (Modus Operandi)

  • नकली आईडी: फर्जी आधार और अन्य दस्तावेज़ तैयार किए गए।
  • बैंक खाते: झूठी पहचान के आधार पर विभिन्न बैंकों में कई खाते खोले गए।
  • प्रशिक्षण केंद्र: फ्लैट को कथित तौर पर “निखिल भैया” नामक मास्टरमाइंड संचालित कर रहा था, जो युवाओं को साइबर अपराध की तकनीकें सिखाता था।
  • धोखाधड़ी लेनदेन: खातों का उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से स्थानांतरित करने में किया जाता था।

पुलिस कार्रवाई

  • छापेमारी: डीएसपी सदर संजीव बेसरा के नेतृत्व में गोंडा पुलिस द्वारा की गई।
  • तत्काल परिणाम: पूछताछ के बाद पाँचों आरोपियों को होटवार जेल भेज दिया गया।
  • अगले कदम: पुलिस वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

व्यापक संदर्भ और सीख

  • झारखंड साइबर अपराध हॉटस्पॉट: जामताड़ा, रामगढ़ और गिरिडीह जैसे जिले लंबे समय से संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के लिए चर्चा में रहे हैं।
  • नागरिक जोखिम: इन फर्जी खातों के माध्यम से कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया हो सकता है।
  • कानून प्रवर्तन संदेश: नकली दस्तावेज़ों की पहचान, सख्त KYC प्रक्रिया और उन्नत लाइवनेस चेक जैसी तकनीकों का प्रभावी उपयोग म्यूल अकाउंट आधारित साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • बैंकिंग सुरक्षा की आवश्यकता: वित्तीय संस्थानों को आधार सत्यापन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और रियल-टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।