प्रत्येक थाने में साइबर पेट्रोलिंग एवं इंटेलिजेंस टीम की स्थापना — समय की अनिवार्य आवश्यकता

Helpline

1930 1512 1064 1291 1095, 25844444 1094, 23241210 1093 1091 112 (24X7) (Toll Free) 14547 (Toll Free)

प्रत्येक थाने में साइबर पेट्रोलिंग एवं इंटेलिजेंस टीम की स्थापना — समय की अनिवार्य आवश्यकता

1. संदर्भ और आवश्यकता

साइबर अपराध आज एक सीमाहीन खतरे के रूप में उभर चुका है, जो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, वेबसाइटों और डिजिटल ऐप्स के माध्यम से नागरिकों को निशाना बना रहा है। लॉ एंड ऑर्डर के दृष्टिकोण से प्रोएक्टिव कदम उठाना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है।
जिस प्रकार पारंपरिक पुलिसिंग में भौतिक पेट्रोलिंग अपराध रोकने का प्रभावी साधन है, उसी प्रकार डिजिटल युग में साइबर पेट्रोलिंग नागरिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाएँ, फ़िशिंग हमले और पहचान की चोरी जैसी घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिनके लिए सतत और सक्रिय निगरानी आवश्यक है।


2. साइबर क्राइम विंग की पहल

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), साइबर क्राइम विंग, तमिलनाडु पुलिस, श्री संदीप मित्तल के नेतृत्व में मुख्यालय स्तर पर एक समर्पित साइबर पेट्रोलिंग और इंटेलिजेंस टीम का गठन किया गया है।
यह पहल कानून प्रवर्तन में एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है, जहाँ शिकायत प्राप्त होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध को पहले ही रोकने पर ज़ोर दिया गया है।

 

3. टीम का कार्यक्षेत्र

टीम को निम्नलिखित प्रमुख जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं:

  • सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, वेबसाइटों और अन्य ऑनलाइन मंचों की निरंतर निगरानी
  • फर्जी निवेश ऐप्स, धोखाधड़ी योजनाओं और भ्रामक अभियानों की पहचान
  • समय रहते हस्तक्षेप कर संभावित पीड़ितों को धोखाधड़ी से बचाना
  • अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले खातों एवं पेजों को निष्क्रिय करना
  • उभरते साइबर अपराध रुझानों और तरीकों पर इंटेलिजेंस संग्रह एवं विश्लेषण
  • राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के साथ समन्वय एवं सूचना साझा करना


4. उपलब्धियाँ

टीम ने अब तक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है:

1. कुल 1,212 संभावित पीड़ितों को बचाया गया

  • 200 पीड़ित तमिलनाडु से
  • 1,012 पीड़ित अन्य राज्यों से

2. 1,507 सोशल मीडिया खातों और पेजों को ब्लॉक किया गया, जो फर्जी निवेश ऐप्स और धोखाधड़ी योजनाओं को बढ़ावा दे रहे थे

3. संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को बाधित कर उनके प्रसार को प्रभावी रूप से कम किया गया


5. रणनीतिक महत्व

यह पहल कई स्तरों पर अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • शिकायत-आधारित कार्रवाई से हटकर रोकथाम आधारित प्रोएक्टिव पुलिसिंग
  • नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों की प्रभावी सुरक्षा
  • डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में पुलिस की क्षमता पर जनता का भरोसा बढ़ाना
  • अन्य राज्यों और एजेंसियों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल फ्रेमवर्क प्रस्तुत करना


6. आगे की राह

इस पहल को और अधिक मज़बूत बनाने के लिए निम्नलिखित कदम सुझाए जाते हैं:

  • जिला एवं ज़ोन स्तर पर समान साइबर पेट्रोलिंग और इंटेलिजेंस टीमों का विस्तार
  • अधिकारियों को उन्नत साइबर फॉरेंसिक, एआई आधारित निगरानी और बहुभाषी धोखाधड़ी पहचान का प्रशिक्षण
  • पैटर्न पहचान, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और स्वचालित अलर्ट हेतु एआई उपकरणों का तकनीकी एकीकरण
  • नागरिकों के लिए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और प्रभावी रिपोर्टिंग तंत्र पर जन-जागरूकता अभियान
  • सोशल मीडिया कंपनियों, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म और CERT-In के साथ सशक्त साझेदारी
  • त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु कानूनी ढाँचे और दिशा-निर्देशों को और मज़बूत करना


7. निष्कर्ष

साइबर पेट्रोलिंग और इंटेलिजेंस टीम की स्थापना आधुनिक पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। तमिलनाडु में इसके शुरुआती परिणाम — 1,200 से अधिक नागरिकों को बचाना और 1,500 से अधिक फर्जी खातों को ब्लॉक करना — इस पहल की आवश्यकता और प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
जिस प्रकार भौतिक पेट्रोलिंग हमारी सड़कों को सुरक्षित रखती है, उसी प्रकार साइबर पेट्रोलिंग हमारे डिजिटल मार्गों को सुरक्षित करेगी, जिससे नागरिकों को विश्वास, सुरक्षा और डिजिटल क्षेत्र में मजबूती प्राप्त होगी।