धोखेबाज़ पारंपरिक टेलीकॉम और डिजिटल संचार प्लेटफ़ॉर्म के बीच नियामक अंतर का फायदा उठाकर साइबर अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं।
जहाँ टेलीकॉम ऑपरेटर धोखाधड़ी रोकथाम को मज़बूत कर रहे हैं, वहीं बिना नियमन वाले मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया प्रमुख निशाने बन रहे हैं। सभी संचार माध्यमों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म-न्यूट्रल फ्रेमवर्क आवश्यक है।
श्री Gopal Vittal, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, Bharti Airtel
भारत का टेलीकॉम क्षेत्र सख्त नियमों के तहत संचालित होता है, लेकिन मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल संचार प्लेटफ़ॉर्म अभी भी बड़े पैमाने पर बिना नियमन के हैं। धोखेबाज़ इस अंतर का फायदा उठाकर साइबर अपराध को बढ़ा रहे हैं। एक प्लेटफ़ॉर्म-न्यूट्रल संचार फ्रेमवर्क सभी संचार माध्यमों में जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, उपभोक्ताओं की रक्षा करेगा और भारत के नियामक दृष्टिकोण को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाएगा।
1. वर्तमान परिदृश्य
टेलीकॉम नियमन
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म
नतीजा
2. प्रमुख चुनौतियाँ
3. प्रस्तावित फ्रेमवर्क
एक प्लेटफ़ॉर्म-न्यूट्रल संचार फ्रेमवर्क टेलीकॉम और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर समान नियम लागू करेगा:
धोखाधड़ी रोकथाम
जवाबदेही
वैध इंटरसेप्शन
उपभोक्ता संरक्षण
डेटा साझाकरण
4. वैश्विक संदर्भ
5. जोखिम और विचार
6. सिफ़ारिशें
भारत को तत्काल एक प्लेटफ़ॉर्म-न्यूट्रल संचार फ्रेमवर्क की आवश्यकता है ताकि टेलीकॉम और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के बीच नियामक अंतर को बंद किया जा सके। यह फ्रेमवर्क:
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