फ्रीज़ या देरी? सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश और साइबर अपराध प्रवर्तन पर बहस

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फ्रीज़ या देरी? सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश और साइबर अपराध प्रवर्तन पर बहस

साइबर अपराध जांच में सबसे बड़ी चुनौती:
संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज़ करने की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है?


सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश

  • मामला: कार्तिक योगेश्वर चतुर बनाम भारत संघ (क्रिमिनल डब्ल्यू.पी. नं. 321/2025) – स्थगित।
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि NCRP पर दर्ज साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंक खातों को फ्रीज़ करना धारा 107 BNSS, 2023 के अंतर्गत होना चाहिए, जिसमें न्यायालय का आदेश आवश्यक है, न कि धारा 106 BNSS के अंतर्गत, जो प्रशासनिक कार्रवाई की अनुमति देता है।
  • भारत संघ ने इस व्याख्या को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, यह कहते हुए कि न्यायिक अनुमति की अनिवार्यता से संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज़ करने में देरी होगी और धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि निकालने या गायब करने का अवसर मिल जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही (13 मार्च 2026)

SPECIAL LEAVE PETITION (CRIMINAL) Diary No(s). 72660/2025

  • पीठ: न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया।
  • कोर्ट ने नोट किया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने हेडस्टार ग्लोबल प्रा. लि. बनाम राज्य केरल (क्रिमिनल एमसी नं. 3740/2025) के फैसले पर भरोसा करते हुए खाते फ्रीज़ करने के आदेश रद्द किए।
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने सुओ मोटू रिट याचिका (क्रिमिनल) नं. 3/2025 का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न हाई कोर्ट के विरोधाभासी दृष्टिकोणों को स्वीकार किया था।

 

सुओ मोटू रिट याचिका (क्रिमिनल) नं. 3/2025 से प्रमुख टिप्पणियाँ

  • पैरा 12: सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट (रश्मि के.आर. बनाम एनसीसीआरपी) और बॉम्बे हाई कोर्ट (कार्तिक योगेश्वर चतुर्वेदी बनाम भारत संघ) के विरोधाभासी निर्णयों पर ध्यान दिया।
  • पैरा 13: कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई और राज्य पुलिस प्राधिकरण, एफआईआर हो या न हो, उन खातों को फ्रीज़ कर सकते हैं जिनमें धनराशि डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों या साइबर अपराधों से जुड़ी हुई है और जिन्हें NCRP/CBI को रिपोर्ट किया गया है।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश (13 मार्च 2026)

  1. विलंब क्षमा किया गया।
  2. नोटिस जारी हुआ।
  3. मामला सुओ मोटू रिट याचिका (क्रिमिनल) नं. 3/2025 के साथ टैग किया गया।
  4. बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का संचालन और प्रभाव स्थगित किया गया।

“इस बीच, विवादित आदेश का संचालन और प्रभाव स्थगित रहेगा।” (सुप्रीम कोर्ट आदेश, 13-03-2026)


प्रभाव

• तत्काल प्रभाव: बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्णय, जिसमें धारा 107 BNSS के अंतर्गत न्यायिक अनुमति आवश्यक बताई गई थी, स्थगित कर दिया गया है। अब तक खाते धारा 106 BNSS के अंतर्गत प्रशासनिक रूप से फ्रीज़ किए जा सकते हैं।

• वृहत्तर महत्व:

  • विभिन्न हाई कोर्ट के विरोधाभासी निर्णयों ने साइबर अपराध प्रवर्तन में अनिश्चितता पैदा की है।
  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करता है कि धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को तुरंत फ्रीज़ करने की शक्ति बनी रहे।
  • अंतिम निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि खाते फ्रीज़ करने के लिए न्यायिक अनुमति आवश्यक है (धारा 107) या प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त है (धारा 106)।

• नीतिगत प्रभाव:
यह मामला व्यक्तिगत अधिकारों (न्यायिक निगरानी) और राज्य की त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता के बीच संतुलन को उजागर करता है।


कानूनी विवाद का सार

  • बॉम्बे हाई कोर्ट: खाते फ्रीज़ करने के लिए धारा 107 लागू होगी – मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक।
  • भारत संघ: धारा 106 के तहत तत्काल कार्रवाई जरूरी; धारा 107 से देरी होने पर राशि निकालने का जोखिम।
  • सुप्रीम कोर्ट (13 मार्च 2026): बॉम्बे HC के आदेश पर स्थगन दिया; फिलहाल खाते धारा 106 के तहत फ्रीज़ किए जा सकते हैं।


नीतिगत प्रभाव

  • धारा 106 का लाभ: त्वरित कार्रवाई से साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों में धनराशि सुरक्षित रहती है।
  • मूल विवाद: गति बनाम न्यायिक निगरानी।
  • सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम स्थिति: अंतिम निर्णय तक धारा 106 लागू रहेगी।