कहते हैं कि इस दुनिया में भगवान की दी हुई नेमतों — जैसे हवा, पानी और सूरज की रोशनी — के अलावा कुछ भी वास्तव में मुफ्त नहीं होता। फ्री हमेशा जिम्मेदारी के साथ आता है। “फ्री” अक्सर एक जाल होता है — जैसे फ्री वाई-फाई, फ्री चार्जिंग, फ्री सॉफ्टवेयर, फ्री मूवीज़ और फ्री OTT सेवाएं।
2026 में भारत में ऐप आधारित साइबर धोखाधड़ी में तेज़ी से वृद्धि हुई। इसमें डीपफेक घोटाले, नकली पहचान (Synthetic Identities) और मनोरंजन या वित्तीय साधनों के रूप में छिपे हुए हानिकारक ऐप शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार 8 मिलियन एंडपॉइंट्स पर 265 मिलियन से अधिक साइबर खतरों का पता चला। धोखाधड़ी अब आकस्मिक उपभोक्ता घोटालों से बढ़कर वित्तीय सेवाओं और रोज़मर्रा के मोबाइल उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने वाले व्यवस्थित हमलों में बदल गई है।
मुंबई के दहिसर क्षेत्र में एक महिला को ₹3.25 लाख की ठगी का सामना करना पड़ा जब उसने इंस्टाग्राम विज्ञापन से Tubi नामक “फ्री मूवी” ऐप डाउनलोड किया। यह ऐप वास्तव में मैलवेयर निकला, जिसने उसके मोबाइल फोन पर दूरस्थ नियंत्रण (Remote Access) हासिल कर लिया।
घटना का विवरण
ठगों की कार्यप्रणाली
जांच की स्थिति
जनता के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह ठगी सोशल इंजीनियरिंग और मैलवेयर इंजेक्शन का मिश्रण है। “फ्री” का लालच देकर ठग लोगों से ऐप इंस्टॉल करवाते हैं, जो बाद में:
2026 में केवल मुंबई में ऐप आधारित साइबर ठगी के मामलों में 40% वृद्धि दर्ज की गई। ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों का दुरुपयोग कर मनोरंजन और निवेश ऐप्स के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
दहिसर की यह घटना “फ्री मूवी ऐप” के बहाने की गई एक मैलवेयर आधारित वित्तीय ठगी का गंभीर उदाहरण है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान ऐप या आकर्षक विज्ञापन पर आंख बंद करके भरोसा न करें और ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल कर धन की रिकवरी का प्रयास करें।
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