पासकी: सुरक्षित डिजिटल पहचान का नया युग

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पासकी: सुरक्षित डिजिटल पहचान का नया युग

“पासकी: सुरक्षित डिजिटल पहचान की भविष्य की चाबी”

पासवर्ड चोरी हो सकते हैं। ओटीपी फ़िशिंग से निकल सकते हैं। लेकिन पासकी खेल बदल देती है।


पासकी: भविष्य की सुरक्षित चाबी

क्योंकि एक हैंडशेक होता है —

  • इसमें ऑनलाइन सेवा नहीं - सभी के पास की रहती है 
  • और प्राइवेट की आपके डिवाइस पर सुरक्षित रहती है।

इससे फ़िशिंग खतरे लगभग समाप्त हो जाते हैं।

अगर कोई ऐप या साइट असली जैसी दिखे लेकिन वास्तव में आपकी लॉगिन जानकारी चुराने की कोशिश कर रही हो, तो वहाँ पासकी से लॉगिन करने का विकल्प ही नहीं मिलेगा।

हम किसी चालाक फ़िशिंग प्रयास से धोखा खा सकते हैं, लेकिन पासकी कभी नहीं।

पासकी कैसे काम करती है

  • एक पब्लिक की ऑनलाइन सेवा के पास रहती है।
  • एक प्राइवेट की आपके डिवाइस पर सुरक्षित रहती है।
  • प्रमाणीकरण एक क्रिप्टोग्राफ़िक हैंडशेक से होता है—कोई पासवर्ड इंटरनेट पर नहीं भेजा जाता।

फ़िशिंग पासकी के सामने क्यों असफल होती है

  • नकली वेबसाइट चाहे असली जैसी दिखे, वह पासकी लॉगिन विकल्प को सक्रिय नहीं कर सकती।
  • इंसान धोखा खा सकता है—लेकिन पासकी नहीं।
  • इससे फ़िशिंग प्रयास, जो सबसे आम साइबर अपराध है, निष्फल हो जाते हैं।

पासकी के लाभ

  • मजबूत सुरक्षा: पासवर्ड पुन: उपयोग, कमजोर क्रेडेंशियल और फ़िशिंग समाप्त।
  • सरल लॉगिन: बस फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या डिवाइस पिन।
  • क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म: ऐप्स, ब्राउज़र और डिवाइस पर काम करती है।
  • प्राइवेसी प्रथम: की आपके डिवाइस से बाहर नहीं जाती, जिससे डेटा उल्लंघन का जोखिम घटता है।

आगे की चुनौतियाँ

  • अपनाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म, सेवा प्रदाता और नियामकों के बीच सहयोग आवश्यक।
  • उपभोक्ता जागरूकता अभियान भरोसा बनाने और अपनाने को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी।
  • बैकअप और रिकवरी तंत्र उपयोगकर्ता-अनुकूल होना चाहिए ताकि लॉकआउट से बचा जा सके।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • टेक दिग्गज — Apple, Google, Microsoft — पासकी समर्थन ला रहे हैं।
  • FIDO Alliance जैसी इंडस्ट्री संस्थाएँ इंटरऑपरेबिलिटी मानक बना रही हैं।
  • विश्वभर के नियामक पासकी को भविष्य के प्रमाणीकरण की आधारशिला मान रहे हैं।

भारत के लिए सिफ़ारिशें

  • बैंकों, टेलीकॉम और सरकारी पोर्टल्स को पासकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • नागरिक जागरूकता अभियान शुरू करें: “पासवर्ड अतीत हैं, पासकी भविष्य है।”
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप इंटरऑपरेबिलिटी और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करें।

पासकी केवल एक अपग्रेड नहीं है—यह एक पैरेडाइम शिफ्ट है।

यह एक ऐसे भविष्य का वादा करती है जहाँ फ़िशिंग ख़तरे समाप्त होंगे, लॉगिन सहज होंगे और डिजिटल पहचान वास्तव में सुरक्षित होगी।