पंजाब पुलिस की बड़ी साइबर कार्रवाई: 63,749 बैंक खाते फ्रीज़, ₹540 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी पर रोक

Helpline

1930 1512 1064 1291 1095, 25844444 1094, 23241210 1093 1091 112 (24X7) (Toll Free) 14547 (Toll Free)

पंजाब पुलिस की बड़ी साइबर कार्रवाई: 63,749 बैंक खाते फ्रीज़, ₹540 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी पर रोक

पंजाब पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा ने पिछले एक वर्ष में 63,749 बैंक खाते फ्रीज़ किए हैं, जो लगभग ₹540.34 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े थे। इसी अवधि में राज्यभर में 62,253 साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए।

धोखाधड़ी की रकम में से लगभग ₹64 करोड़ पीड़ितों को 2024 से अब तक वापस दिलाया गया है। सबसे प्रभावित क्षेत्र एनआरआई बेल्ट दोआबा है, जहाँ जालंधर में 20,000 से अधिक खाते फ्रीज़ किए गए और ₹7.30 करोड़ से अधिक की रिकवरी हुई। कपूरथला और होशियारपुर भी प्रमुख प्रभावित जिलों में शामिल हैं।

डीजीपी श्री गौरव यादव ने बताया कि इस कार्रवाई से न केवल धोखाधड़ी वाले खाते फ्रीज़ हुए हैं, बल्कि देशभर में सक्रिय संगठित साइबर अपराध नेटवर्क भी उजागर हुए हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दें।

मुख्य तथ्य

  • फ्रीज़ किए गए खाते: 63,749 बैंक खाते, लगभग ₹540.34 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़े।
  • दर्ज मामले: 62,253 साइबर अपराध केस (2024 से अब तक)।
  • वापस दिलाई गई राशि: लगभग ₹64 करोड़ पीड़ितों को लौटाए गए, जिनमें ₹38.42 करोड़ जनवरी 2025 से।
  • रिकवरी दर: धोखाधड़ी की रकम फ्रीज़ करने की दर 16.13% से बढ़कर 23.43% हुई, जो बेहतर वित्तीय ट्रैकिंग को दर्शाती है।

डीजीपी श्री गौरव यादव का बयान

  • इस कार्रवाई से देशभर में सक्रिय संगठित साइबर अपराध नेटवर्क उजागर हुए।
  • जांच में अंतर-राज्यीय लिंक, वित्तीय ट्रेल और उन्नत धोखाधड़ी तरीकों का पता चला।
  • समय पर हस्तक्षेप और तकनीकी उपकरणों ने नेटवर्क को बाधित किया और नागरिकों की बचत को सुरक्षित किया।

जोखिम और नागरिक जागरूकता

  • एनआरआई बेल्ट दोआबा (जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर) सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है।

क्यों एनआरआई निशाने पर होते हैं:

  • उच्च रेमिटेंस फ्लो: विदेश से आने वाले पैसों को धोखेबाज आसान लक्ष्य मानते हैं।
  • विश्वास कारक: एनआरआई खाते स्थानीय रिश्तेदारों द्वारा संचालित होते हैं, जिससे धोखेबाज बैंक अधिकारियों का रूप धरकर धोखा देते हैं।
  • डिजिटल निर्भरता: ऑनलाइन ट्रांसफर और डिजिटल बैंकिंग का अधिक उपयोग होने से फ़िशिंग और अकाउंट टेकओवर का खतरा बढ़ता है।
  • धन का संकेंद्रण: दोआबा क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय अधिक है, इसलिए धोखेबाज यहाँ अधिक लाभ देखते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक दबाव: “विदेशी रेमिटेंस”, “वीज़ा समस्या” या “कस्टम क्लियरेंस” जैसे बहानों से लोग जल्दी झांसे में आ जाते हैं।

नागरिकों के लिए सुझाव

  • फ़िशिंग ईमेल, नकली पॉप-अप और अनचाहे कॉल से सतर्क रहें।
  • किसी भी धोखाधड़ी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दें।
  • समय पर रिपोर्ट करने से धन की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।