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ऑपरेशन साइबर प्रहार: पश्चिम बंगाल पुलिस का साइबर अपराध पर जोरदार वार

पश्चिम बंगाल पुलिस ने ऑपरेशन साइबर प्रहार के तहत भारत के सबसे बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट्स में से एक को ध्वस्त कर दिया है, ₹92.6 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया, 107 आरोपियों को गिरफ्तार किया और सैकड़ों धोखाधड़ी ढाँचों को ब्लॉक किया। यह भारत की संगठित साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम है।

ऑपरेशन साइबर प्रहार की मुख्य बातें

  • धोखाधड़ी मूल्य: ₹92.6 करोड़ संगठित साइबर सिंडिकेट्स से जुड़ा।
  • गिरफ्तारी: बंगाल भर में 107 व्यक्ति, जिनमें से 40 मुख्य संदिग्ध साइबर क्राइम विंग द्वारा पकड़े गए।
  • एफआईआर दर्ज: केवल एक सप्ताह में 69 मामले।
  • गैरकानूनी कॉल सेंटर: कोलकाता में 3 केंद्रों पर छापे, तकनीकी सहायता धोखाधड़ी संचालित।
  • सिम कार्ड निष्क्रिय: धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े 400 से अधिक सिम बंद।

धोखेबाजों की कार्यप्रणाली

  • म्यूल अकाउंट्स: चोरी किए गए धन को कई बैंकों के माध्यम से सफेद किया।
  • फर्जी कॉल सेंटर: वित्तीय संस्थानों और टेक सपोर्ट का रूप धारण कर पीड़ितों को ठगा।
  • एटीएम और पीओएस नेटवर्क: नकद निकासी बिंदुओं और अवैध सिम वितरण का दुरुपयोग।
  • सोशल इंजीनियरिंग: नकली निवेश वादे, ऋण ऑफर और फ़िशिंग ओवरले से पीड़ितों को फंसाया।

नागरिक सलाह

  • केवल आधिकारिक स्टोर्स (Google Play, Apple App Store) से ही ऐप डाउनलोड करें।
  • “फ्री” सेवाओं या अवास्तविक रिटर्न से बचें—ये आम धोखाधड़ी जाल हैं।
  • संदिग्ध गतिविधि तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर रिपोर्ट करें।
  • सभी भुगतान ऐप्स पर दो स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) सक्षम करें।
  • बैंकिंग और मनोरंजन ऐप्स के लिए अलग अलग डिवाइस का उपयोग करें।

रणनीतिक प्रभाव

  • संगठित नेटवर्क का विघटन: अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय लिंक वाले सिंडिकेट्स ध्वस्त।
  • वित्तीय फॉरेंसिक्स: ₹92.6 करोड़ फ्रीज़, आगे के दुरुपयोग को रोका गया।
  • डिजिटल निगरानी: अवैध ढाँचे निष्क्रिय, मैलवेयर सिग्नेचर ISPs के साथ साझा।
  • कानून प्रवर्तन क्षमता: भारत की साइबर कानून प्रवर्तन और डिजिटल सतर्कता में बढ़ती ताकत का प्रदर्शन।

निष्कर्ष

ऑपरेशन साइबर प्रहार: बंगाल में ₹92.6 करोड़ साइबर धोखाधड़ी रैकेट ध्वस्त। 107 गिरफ्तार, 3 कॉल सेंटर पर छापे, 400+ सिम निष्क्रिय। सतर्क रहें, धोखाधड़ी की रिपोर्ट हेल्पलाइन 1930 पर करें।

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Key Takeaways

Sources & References

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