मानव प्रधानता, न्यायिक स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित एआई शासन की रूपरेखा
न्यायालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग हेतु मसौदा विनियम, 2026
मानव प्रधानता और न्यायिक स्वतंत्रता पर केंद्रित
मसौदा विनियमों की प्रमुख विशेषताएँ
मानव प्रधानता और न्यायिक स्वतंत्रता
एआई केवल सहायक भूमिका निभाएगा; अंतिम निर्णय न्यायाधीशों के पास रहेगा।
उद्धरण: “न्यायालय की प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग सदैव मानव निर्णय और न्यायिक अधिकार के अधीन रहेगा।”
कानून का शासन और निष्पक्ष सुनवाई
एआई का प्रयोग संविधान, प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
निष्पक्षता और भेदभाव-निरोध
जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता या आर्थिक स्थिति के आधार पर पक्षपात करने वाले एआई का प्रयोग निषिद्ध है।
पारदर्शिता और समझाने योग्य प्रणाली
एआई सिस्टम समझाने योग्य होना चाहिए; “ब्लैक बॉक्स” मॉडल पर विशेष निगरानी होगी।
जवाबदेही और ऑडिट
एआई की सहायता से लिए गए निर्णय की जिम्मेदारी न्यायिक अधिकारी पर होगी; नियमित ऑडिट अनिवार्य है।
डेटा संरक्षण और गोपनीयता
संवेदनशील न्यायिक डेटा को उच्चतम स्तर की सुरक्षा दी जाएगी।
अनुमेय उपयोग
केस प्रबंधन, ट्रांसक्रिप्शन, अनुवाद, कानूनी शोध, प्रशासनिक सहायता, दिव्यांगजन हेतु सहायक सेवाएँ, दस्तावेज़ सत्यापन, गुमनाम प्रकाशन आदि।
निषिद्ध उपयोग
संस्थागत ढाँचा
सर्वोच्च निकाय, एआई समितियाँ, तकनीकी समिति, साइबर सुरक्षा समिति और एआई सचिवालय।
निगरानी और घटना प्रबंधन
एआई रजिस्टर, ऑडिट, घटना डेटाबेस, आपातकालीन प्रोटोकॉल, पारदर्शिता रिपोर्ट।
क्षमता निर्माण
प्रशिक्षण कार्यक्रम और सर्वोत्तम प्रथाओं का भंडार।
शिकायत निवारण
शिकायतों और उपायों हेतु विशेष व्यवस्था।
क्या जोड़ा जाना चाहिए?
निष्कर्ष
यह मसौदा भारत की न्यायपालिका में जिम्मेदार एआई अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसमें सत्यापन, जोखिम वर्गीकरण, पारदर्शिता और वादकारियों के अधिकारों को और मजबूत किया जाए, तो यह अधिक प्रभावी, जवाबदेह और भविष्य-उन्मुख नियामक ढाँचा बन सकता है।
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