नागरिकों को साइबर सुरक्षा में सहभागी बनाना: Suspect Repository और GAC अपील प्रक्रिया

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नागरिकों को साइबर सुरक्षा में सहभागी बनाना: Suspect Repository और GAC अपील प्रक्रिया

Be the Police और Cyber Safe ऐसी दो पहल हैं जो प्रत्येक नागरिक को पुलिस अधिकारी और साइबर योद्धा की तरह कार्य करने के लिए सक्षम बनाती हैं।
आज हम चर्चा करेंगे कि कोई नागरिक धोखाधड़ी वाले कॉल, संदेश या ईमेल को पुलिस की तरह कैसे रिपोर्ट कर सकता है, और यदि किसी को लगता है कि उसका नंबर या ईमेल गलती से ब्लॉक हो गया है तो उसे कैसे पुनः सक्रिय किया जा सकता है।

इसमें एक महत्वपूर्ण साधन है Suspect Repository, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध है। इसका उद्देश्य नागरिकों को संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट लिंक साझा करने और जाँचने की सुविधा देना है।


Suspect Repository उपयोग की प्रक्रिया

1. पोर्टल पर जाएँ

  • आधिकारिक वेबसाइट खोलें: https://cybercrime.gov.in
  • होमपेज पर “Suspect Repository” विकल्प चुनें।

2. संदिग्ध जानकारी दर्ज करें

  • यहाँ आप किसी भी संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, सोशल मीडिया अकाउंट या वेबसाइट लिंक दर्ज कर सकते हैं।
  • यदि आपको कोई धोखाधड़ी वाला संदेश, कॉल या ईमेल मिला है, तो उसकी जानकारी यहाँ डालें।

3. विवरण जोड़ें

  • संदिग्ध गतिविधि का संक्षिप्त विवरण लिखें (जैसे Loan Fraud SMS, Phishing Email, Fake Job Offer)।
  • यदि संभव हो तो स्क्रीनशॉट या दस्तावेज़ अपलोड करें।

4. सबमिट करें

  • जानकारी भरने के बाद Submit पर क्लिक करें।
  • यह डेटा राष्ट्रीय स्तर पर रिपॉज़िटरी में जुड़ जाता है।

5. रिपॉज़िटरी में खोजें

  • नागरिक और अधिकारी दोनों इस रिपॉज़िटरी में जाकर किसी भी नंबर/ईमेल/लिंक को खोज सकते हैं।
  • यदि वह पहले से रिपोर्ट हुआ है, तो उसकी जानकारी दिखाई देगी।
  • इससे आप जान सकते हैं कि कोई नंबर या ईमेल पहले से संदिग्ध घोषित किया गया है या नहीं।

6. नागरिकों के लिए लाभ

  • सतर्कता: किसी भी संदिग्ध नंबर/ईमेल को तुरंत जाँच सकते हैं।
  • साझा जानकारी: पूरे देश के नागरिकों द्वारा रिपोर्ट किए गए संदिग्ध डेटा का लाभ मिलता है।
  • रोकथाम: धोखाधड़ी से बचने के लिए पहले से चेतावनी मिल जाती है।

Suspect Repository एक सामूहिक सुरक्षा तंत्र है, जहाँ नागरिक और अधिकारी मिलकर संदिग्ध डिजिटल पहचान को चिन्हित करते हैं। इससे धोखाधड़ी रोकने और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है।


अपील और ग्रिवेन्स मैकेनिज़्म

यदि किसी को लगता है कि उसका नंबर या ईमेल गलती से ब्लॉक हो गया है, तो वह नीचे दिए गए अपील और ग्रिवेन्स मैकेनिज़्म का प्रयोग कर सकता है।

यदि कोई व्यक्ति किसी मध्यस्थ (Intermediary) के Grievance Officer के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह Grievance Appellate Committee (GAC) के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है।

  • शिकायत केवल तभी दर्ज करें जब संबंधित मध्यस्थ के Grievance Officer (GO) से संपर्क किया गया हो।
  • अपील GO के निर्णय प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर करनी होगी, या यदि GO/मध्यस्थ से 30 दिनों में कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ हो।

GAC उन अपीलों से संबंधित है जो उपयोगकर्ताओं (Digital Nagriks) द्वारा सोशल मीडिया मध्यस्थों और अन्य मध्यस्थों के Grievance Officers के निर्णयों के विरुद्ध की जाती हैं। ये अपील नियमों के उल्लंघन या मध्यस्थ द्वारा उपलब्ध कराए गए कंप्यूटर संसाधनों से संबंधित मामलों पर आधारित होती हैं।


GAC की विशेषताएँ

  • एक ऑनलाइन विवाद निवारण तंत्र।
  • पूरी अपील प्रक्रिया—फाइलिंग से लेकर निर्णय तक—डिजिटल मोड में होती है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 [IT Rules, 2021] के अंतर्गत कार्य करती है।
  • भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करती है।
  • सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स (Facebook, Instagram, WhatsApp, Twitter, LinkedIn आदि) से संबंधित अपीलों का निवारण करती है।


ध्यान दें

  • वित्तीय धोखाधड़ी या साइबर अपराध से संबंधित मामलों की रिपोर्ट साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें या वेबसाइट https://www.cybercrime.gov.in पर जाएँ।
  • अपील दर्ज करने से पहले सहायता हेतु GAC वेबसाइट पर उपलब्ध FAQ (https://gac.gov.in/CMSData/FAQs) देखें।
  • GAC वित्तीय धोखाधड़ी या साइबर अपराध मामलों का निवारण नहीं करती।