म्यूल बैंक खातों की खरीद–फरोख्त में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है और भारी धनराशि विदेशों में बैठे ठगों तक पहुँच रही है।
ऑपरेशन साइहॉक (Operation CyHawk) के तहत दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हज़ारों म्यूल बैंक खातों का पता लगाया। रिपोर्टों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने विभिन्न बैंकों में संदिग्ध खातों का मानचित्रण और सत्यापन किया तथा उन्हें लगभग ₹944 करोड़ के लेन-देन से जोड़ा। यह अभियान धोखाधड़ी नेटवर्क की रीढ़ को तोड़ने पर केंद्रित था, जिसमें म्यूल खातों के बड़े समूहों को निशाना बनाया गया।
पिंपरी चिंचवड़ पुलिस की हालिया जांच में एक गंभीर प्रवृत्ति सामने आई है, जहाँ साइबर अपराधी फेसबुक और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलेआम म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने भी कई मामलों का खुलासा किया है, जिनमें म्यूल खातों की खरीद, बिक्री और किराए पर देने जैसी गतिविधियाँ सामने आई हैं।
इन मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों—जैसे टैक्सी चालक, सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक और बेरोजगार युवक—को ऊँचे कमीशन, मुफ्त यात्रा, आलीशान ठहराव और मासिक किराए के लालच में फँसाया जा रहा है।
अपराध की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
1. कमजोर व्यक्तियों को निशाना बनाना
2. भ्रामक विज्ञापन और झूठे वादे
3. म्यूल खातों का दुरुपयोग
4. सोशल मीडिया पर खुली खरीद-फरोख्त
प्रमुख निष्कर्ष
जोखिम और प्रभाव
व्यक्तियों के लिए
समाज के लिए
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए
रोकथाम के उपाय
नागरिक स्तर पर
कानून प्रवर्तन स्तर पर
बैंकिंग क्षेत्र में
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका
निष्कर्ष
म्यूल बैंक खातों का बढ़ता व्यापार साइबर अपराधियों की बढ़ती रणनीतिक समझ को दर्शाता है। आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को धन और विलासिता के झूठे वादों में फँसाकर एक समानांतर अवैध वित्तीय व्यवस्था खड़ी की जा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए जागरूकता, सख्त नियमन और सक्रिय पुलिसिंग अत्यंत आवश्यक है।
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