“मजबूत ढाँचे कमजोर कानूनों से नहीं, बल्कि कमजोर प्रवर्तन और मानवीय हेरफेर से असफल होते हैं।”
आरबीआई की अपडेटेड KYC निर्देश, 2025 के बावजूद म्यूल अकाउंट का खतरा लगातार बना हुआ है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण से वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित रखने हेतु सख्त KYC मानक निर्धारित किए हैं।
RBI द्वारा निर्धारित प्रमुख KYC प्रावधान
FATF की भूमिका
FATF (Financial Action Task Force) मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने हेतु वैश्विक मानक तय करता है।
भारत, FATF का सदस्य होने के नाते, यह सुनिश्चित करता है कि RBI का KYC ढाँचा इन सिद्धांतों को दर्शाता हो।
म्यूल अकाउंट क्यों अब भी फल-फूल रहे हैं
मजबूत KYC नियमों के बावजूद, साइबर अपराधी प्रणालीगत खामियों और मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं।
1. सोशल इंजीनियरिंग और भर्ती
2. पहचान चोरी और कृत्रिम पहचान
3. बैंकों में परिचालन खामियाँ
4. अंदरूनी मिलीभगत
5. सीमा-पार खामियाँ
6. डिजिटल अंधे क्षेत्र
7. नागरिक जागरूकता की कमी
निष्कर्ष
“KYC ताला है, लेकिन सतर्कता चाबी है। नागरिक जागरूकता और सख्त प्रवर्तन के बिना, म्यूल अकाउंट्स साइबर अपराध के मौन वाहक बने रहेंगे।”
म्यूल अकाउंट = साइबर अपराध का द्वार।
अपना खाता किराए पर न दें।
Like on Facebook
Follow on Twitter
Follow on Instagram
Subscribe On YT