मीडिया पर अवैध पेड विज्ञापनों के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई

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मीडिया पर अवैध पेड विज्ञापनों के खिलाफ केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई

भारत सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया है, जिसमें निर्देश दिया गया है कि वह तुरंत Instagram पर चल रहे उन पेड विज्ञापनों को हटाए जो कथित रूप से बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) को बढ़ावा दे रहे थे। Meta को 7 दिन का समय दिया गया है जवाब देने के लिए, अन्यथा IT Act, 2000 और POCSO Act, 2012 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

घटना का कारण (Trigger)

  • BBC की जांच में पाया गया कि Instagram पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे जिनमें “rape video” और “child video” जैसे शब्द शामिल थे।
  • ये विज्ञापन कथित तौर पर यूज़र्स को Telegram चैनलों पर ले जा रहे थे, जहाँ बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) बेची जा रही थी।
  • जांच से पता चला कि अपराधी नेटवर्क Instagram के विज्ञापन सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे थे ताकि यौन शोषण सामग्री को प्रमोट कर आर्थिक लाभ कमाया जा सके।
  • ये विज्ञापन ऑर्गेनिक पोस्ट नहीं थे, बल्कि पेड प्रमोशन थे, जिससे Meta को सीधे राजस्व प्राप्त हो रहा था।
  • इस खुलासे ने कंटेंट मॉडरेशन की प्रभावशीलता और एल्गोरिदमिक एम्प्लीफिकेशन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

सरकार ने क्या कहा?

  • सभी पेड विज्ञापनों तथा CSEAM तक पहुँच उपलब्ध कराने वाली सामग्री को तत्काल हटाया जाए।
  • यह स्पष्ट किया जाए कि ऐसे विज्ञापनों को स्वीकृति कैसे मिली और सुरक्षा प्रणाली कहाँ विफल रही।
  • यौन शोषण सामग्री के एल्गोरिदमिक प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए जाएँ।

Meta के लिए संभावित जोखिम

  • Meta "third-party content" का बचाव नहीं कर सकता, क्योंकि संबंधित सामग्री पेड विज्ञापनों के रूप में प्रकाशित हुई थी, जिससे प्लेटफ़ॉर्म को राजस्व प्राप्त हुआ।
  • यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो Meta को जुर्माना, अभियोजन और कड़े नियामक नियंत्रण का सामना करना पड़ सकता है।

Meta की प्रतिक्रिया

  • Meta ने कहा कि बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति उसकी "zero-tolerance policy" है, जिसमें विज्ञापन भी शामिल हैं।
  • कंपनी का दावा है कि वह ऐसी सामग्री की पहचान और रोकथाम के लिए उन्नत AI तकनीक का उपयोग करती है।
  • Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अपराधी उसके सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने का प्रयास करते रहते हैं।

व्यापक प्रभाव

बाल सुरक्षा:
यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन और विज्ञापन समीक्षा प्रणाली में मौजूद गंभीर कमियों को उजागर करता है।

नियामक निगरानी:
भारत में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर पेड विज्ञापनों की निगरानी और नियामक सख्ती बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक प्रभाव:
अन्य देशों में भी इसी प्रकार की चिंताएँ सामने आई हैं, जिससे Meta पर वैश्विक स्तर पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह नोटिस सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर यौन शोषण से जुड़े अवैध पेड विज्ञापनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संकेत है। अब Meta के लिए आवश्यक होगा कि वह जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रभावी सुरक्षा उपायों का प्रदर्शन करे, ताकि कानूनी दायित्वों का पालन सुनिश्चित हो सके तथा उपयोगकर्ताओं का विश्वास बनाए रखा जा सके।