कांवड़ यात्रा 2026: हरिद्वार में पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती, ऑनलाइन खतरों पर रहेगी रियल-टाइम निगरानी

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कांवड़ यात्रा 2026: हरिद्वार में पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती, ऑनलाइन खतरों पर रहेगी रियल-टाइम निगरानी

“साइबर कमांडो”, जो शीर्ष तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षित हैं, हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तेजक, भ्रामक और धोखाधड़ी वाले ऑनलाइन कंटेंट की वास्तविक समय में निगरानी और कार्रवाई के लिए तैनात किए गए हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती की गई है।

दस विशेष रूप से प्रशिक्षित “साइबर कमांडो” को उत्तराखंड पुलिस ने आगामी कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार में तैनात किया है, जो 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है। ये अधिकारी, शीर्ष तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षित, वास्तविक समय में उत्तेजक, भ्रामक और धोखाधड़ी वाले ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी एवं उस पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।

प्रशिक्षण एवं संस्थान

प्रशिक्षण स्रोत: भारत के शीर्ष तकनीकी संस्थान (जैसे IITs तथा अन्य राज्यों में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज़ यूनिवर्सिटी)।

अर्जित कौशल:

  • साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल ट्रेसिंग।
  • ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग और घोटालों का पता लगाना।
  • एआई द्वारा बनाए गए डीपफेक और गलत सूचना की पहचान।
  • सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की वास्तविक समय में निगरानी।
  • घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया तथा हानिकारक कंटेंट को शीघ्र हटाना।

भूमिकाएँ एवं ज़िम्मेदारियाँ

  • यात्रा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की चौबीसों घंटे निगरानी।
  • भ्रामक, उत्तेजक या धोखाधड़ी वाले पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के मार्गदर्शन में कार्य करना।

रणनीतिक महत्व

  • राष्ट्रीय स्तर पर इसी प्रकार की साइबर कमांडो पहल उत्तर प्रदेश तथा पुणे स्थित DIAT में गृह मंत्रालय के तहत शुरू की जा रही है।
  • लक्ष्य देशभर में हज़ारों अधिकारियों को प्रशिक्षित करना है।
  • अगले पाँच वर्षों में पूरे भारत में 5,000 साइबर कमांडो का बल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

चुनौतियाँ

  • जनसमूह के दौरान लाखों सोशल मीडिया पोस्ट की निगरानी और प्रबंधन।
  • एआई-जनित डीपफेक तथा स्वचालित गलत सूचना अभियानों का बढ़ता खतरा।
  • साइबर कमांडो और पारंपरिक पुलिस बलों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
  • तीर्थयात्रियों को अप्रमाणित जानकारी साझा करने से बचने के लिए जागरूक करना।

हरिद्वार में 10 साइबर कमांडो की तैनाती भारत की विकसित होती साइबर अपराध-रोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक तथा एआई-आधारित खतरे की पहचान में उनका प्रशिक्षण उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों तीर्थयात्रियों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है। साथ ही, यह पहल भविष्य में पूरे देश में साइबर रक्षा तंत्र के विस्तार के लिए एक प्रभावी पायलट मॉडल के रूप में भी देखी जा रही है।