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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन (Johannesburg) में स्पष्ट कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग आतंकवाद, अपराध और डीपफेक जैसे क्षेत्रों में सख्ती से प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने विश्व नेताओं से आग्रह किया कि एक वैश्विक समझौता (Global Compact) बनाया जाए, जिससे एआई का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग सुनिश्चित हो और इसके दुरुपयोग पर मजबूत नियंत्रण रहे।
एआई का दुरुपयोग—विशेषकर डीपफेक्स के माध्यम से—गंभीर खतरे पैदा करता है: यह वास्तविकता को विकृत कर सकता है, प्रोपेगेंडा फैला सकता है, लोकतंत्र में विश्वास को कमजोर कर सकता है और आतंकवादी संगठनों को भर्ती, योजना और साइबर हमलों के लिए नए उपकरण प्रदान कर सकता है।
डीपफेक्स के खतरे
- भ्रामक सूचना और प्रोपेगेंडा: अत्यधिक वास्तविक दिखने वाले नकली वीडियो और ऑडियो जनमत को प्रभावित कर सकते हैं, चुनावों को बिगाड़ सकते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकते हैं।
- धोखाधड़ी और घोटाले: एआई-जनित आवाज़ें और वीडियो पहले से ही डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों और फ़िशिंग हमलों में उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए धोखा दिया जा रहा है।
- विश्वास का क्षरण: जब “देखना ही मानना नहीं रह जाता,” तो नागरिक मीडिया, शासन और व्यक्तिगत संचार पर भरोसा खो देते हैं।
- सामाजिक अशांति: डीपफेक्स साम्प्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, घृणा फैलाने वाले भाषण फैला सकते हैं या झूठी घटनाएँ गढ़ सकते हैं जो समाज को अस्थिर कर दें।
- लक्षित उत्पीड़न: व्यक्तियों को बदनाम या ब्लैकमेल करने के लिए नकली सामग्री का उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचता है
आतंकवादी मॉड्यूल में एआई का उपयोग
- प्रोपेगेंडा का विस्तार: आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे संगठन एआई टूल्स का प्रयोग कर परिष्कृत वीडियो, सिंथेटिक वॉइस क्लिप और नकली समाचार बना रहे हैं जो असली पत्रकारिता जैसे दिखते हैं।
- भर्ती और कट्टरपंथीकरण: एआई-जनित सामग्री भावनात्मक रूप से कमजोर व्यक्तियों को प्रभावित कर सकती है, जिससे उग्रवादी विचार अधिक प्रभावी बन जाते हैं।
- संचालन योजना: बड़े भाषा मॉडल आतंकवादियों को रणनीति सीखने, हमले की योजना बनाने और लॉजिस्टिक्स समन्वय में मदद कर सकते हैं।
- साइबर युद्ध: एआई का उपयोग हैकिंग, फ़िशिंग और मैलवेयर फैलाने के लिए हथियार के रूप में किया जा सकता है, जिससे महत्वपूर्ण ढाँचे और वित्तीय प्रणालियाँ निशाना बनती हैं।
- युद्धक्षेत्र भ्रम: नकली छवियाँ और वीडियो संघर्षों की वास्तविकता को विकृत कर सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को गुमराह कर सकते हैं और मानवीय प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं
पीएम मोदी के वक्तव्य की मुख्य बातें
- एआई दुरुपयोग पर सख्त रोक: एआई को कभी भी आतंकवाद, अपराध या डीपफेक्स को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
- वैश्विक समझौते का प्रस्ताव: एआई को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते की आवश्यकता है, जिसमें मानव पर्यवेक्षण, सुरक्षा-आधारित डिज़ाइन और पारदर्शिता पर ध्यान हो।
- जिम्मेदार एआई उपयोग: तकनीक मानवता की सेवा करे, नुकसान न पहुँचाए। अनियंत्रित दुरुपयोग समाजों को अस्थिर कर सकता है।
- डीपफेक चिंताएँ: डीपफेक्स लोकतंत्र को खतरे में डालते हैं, गलत सूचना फैलाते हैं और विश्वास को कमजोर करते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
- वैश्विक सुरक्षा: आतंकवादी संगठन एआई का उपयोग प्रोपेगेंडा या साइबर हमलों के लिए कर सकते हैं, जिससे अभूतपूर्व जोखिम पैदा हो सकते हैं।
- जन विश्वास: डीपफेक्स लोकतंत्र, न्याय और सामाजिक सद्भाव को भ्रामक बातों के माध्यम से कमजोर कर सकते हैं
पीएम मोदी का जोहानेसबर्ग संबोधन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सशक्त आह्वान था, ताकि एआई प्रगति का साधन बने, हथियार नहीं। उनका रुख एआई दुरुपयोग पर बढ़ती वैश्विक चिंता और सामूहिक सुरक्षा उपायों की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाता है।
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