माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन (Johannesburg) में स्पष्ट कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग आतंकवाद, अपराध और डीपफेक जैसे क्षेत्रों में सख्ती से प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने विश्व नेताओं से आग्रह किया कि एक वैश्विक समझौता (Global Compact) बनाया जाए, जिससे एआई का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग सुनिश्चित हो और इसके दुरुपयोग पर मजबूत नियंत्रण रहे।
एआई का दुरुपयोग—विशेषकर डीपफेक्स के माध्यम से—गंभीर खतरे पैदा करता है: यह वास्तविकता को विकृत कर सकता है, प्रोपेगेंडा फैला सकता है, लोकतंत्र में विश्वास को कमजोर कर सकता है और आतंकवादी संगठनों को भर्ती, योजना और साइबर हमलों के लिए नए उपकरण प्रदान कर सकता है।
डीपफेक्स के खतरे
आतंकवादी मॉड्यूल में एआई का उपयोग
पीएम मोदी के वक्तव्य की मुख्य बातें
यह क्यों महत्वपूर्ण है
पीएम मोदी का जोहानेसबर्ग संबोधन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सशक्त आह्वान था, ताकि एआई प्रगति का साधन बने, हथियार नहीं। उनका रुख एआई दुरुपयोग पर बढ़ती वैश्विक चिंता और सामूहिक सुरक्षा उपायों की तात्कालिक आवश्यकता को दर्शाता है।
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