भारत में ट्रांसनेशनल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का बढ़ता जोखिम
1. परिप्रेक्ष्य और उभरते रुझान
हाल के वर्षों में भारत में साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों में तेज़ी से वृद्धि हुई है।
धोखेबाज़ अब सीमाओं के पार काम कर रहे हैं और नकली वेबसाइटों, मोबाइल ऐप्स, डिजिटल भुगतान चैनलों तथा जाली दस्तावेज़ों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं।
ये नेटवर्क अत्यधिक संगठित और लचीले हैं, जो सर्वर, पहचान और भौगोलिक स्थान बदलकर जांच एजेंसियों से बच निकलते हैं।
2. कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
नकली पहचान और पोर्टल
प्रयुक्त तकनीकें
संचालन का फैलाव
3. पीड़ितों की प्रोफ़ाइल
उच्च जोखिम वाले समूह
भौगोलिक फैलाव
4. कानून प्रवर्तन की प्रतिक्रिया
घरेलू कदम
30 जनवरी को CBI द्वारा कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर इन नेटवर्कों को ध्वस्त किया गया।
संदिग्ध खातों और धन प्रवाह की निगरानी को और सख़्त किया गया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
इंटरपोल और विभिन्न विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया।
धोखाधड़ी वाले डोमेन और सर्वरों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा की गई।
क्षमता निर्माण
अधिकारियों को साइबर अपराध जांच और डिजिटल फॉरेंसिक में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
CERT-In और विशेष साइबर इकाइयों को और मज़बूत किया जाना चाहिए।
5. प्रमुख चुनौतियाँ
6. निवारक उपाय और जन-जागरूकता
नागरिकों के लिए सुझाव
संस्थागत कदम
7. प्रभाव
साइबर धोखाधड़ी अब अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का स्वरूप ले चुकी है।
भारत द्वारा की गई सक्रिय कार्रवाई—छापेमारी, गिरफ्तारी और वैश्विक सहयोग—अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नियंत्रण के लिए एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
लगातार जन-जागरूकता, संस्थागत मज़बूती और वैश्विक सहयोग ही इन नेटवर्कों पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।
8. मुख्य संदेश
अधिकारियों के लिए
खुफ़िया जानकारी साझा करें, फॉरेंसिक-आधारित जांच अपनाएँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करें।
नागरिकों के लिए
सतर्क रहें, किसी भी पोर्टल की विश्वसनीयता की जाँच करें और अनौपचारिक भुगतान चैनलों से दूर रहें।
संस्थानों के लिए
जागरूकता अभियान, प्रभावी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करें।
Like on Facebook
Follow on Twitter
Follow on Instagram
Subscribe On YT