इंटरपोल–CBI की संयुक्त पहल साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों के विरुद्ध बढ़ती वैश्विक जंग

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इंटरपोल–CBI की संयुक्त पहल साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों के विरुद्ध बढ़ती वैश्विक जंग

भारत में ट्रांसनेशनल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का बढ़ता जोखिम

1. परिप्रेक्ष्य और उभरते रुझान

हाल के वर्षों में भारत में साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों में तेज़ी से वृद्धि हुई है।
धोखेबाज़ अब सीमाओं के पार काम कर रहे हैं और नकली वेबसाइटों, मोबाइल ऐप्स, डिजिटल भुगतान चैनलों तथा जाली दस्तावेज़ों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं।
ये नेटवर्क अत्यधिक संगठित और लचीले हैं, जो सर्वर, पहचान और भौगोलिक स्थान बदलकर जांच एजेंसियों से बच निकलते हैं।

2. कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
नकली पहचान और पोर्टल

  • वीज़ा सेवा प्रदाता
  • विदेशी नौकरी भर्ती एजेंसियाँ
  • निवेश प्लेटफ़ॉर्म
  • सरकारी पोर्टल की नकली प्रतिकृतियाँ

प्रयुक्त तकनीकें

  • धोखाधड़ी वाले डोमेन का पंजीकरण (जैसे eservicemoi-kw.com)
  • नकली वीज़ा दस्तावेज़ और नौकरी ऑफ़र अपलोड करना
  • म्यूल बैंक खातों के माध्यम से धन को विदेशों में स्थानांतरित करना
  • डिजिटल वॉलेट, UPI और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये तेज़ लेन-देन

संचालन का फैलाव

  • भारत के कई राज्यों में नेटवर्क की उपस्थिति, जिनमें बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं
  • सर्वर और पीड़ित अलग-अलग देशों में स्थित

3. पीड़ितों की प्रोफ़ाइल
उच्च जोखिम वाले समूह

  • नौकरी तलाशने वाले व्यक्ति
  • वीज़ा आवेदक
  • अधिक लाभ के लालच में निवेश करने वाले निवेशक

भौगोलिक फैलाव

  • अमेरिका
  • यूरोप
  • मध्य पूर्व
  • दक्षिण-पूर्व एशिया

4. कानून प्रवर्तन की प्रतिक्रिया
घरेलू कदम

30 जनवरी को CBI द्वारा कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर इन नेटवर्कों को ध्वस्त किया गया।
संदिग्ध खातों और धन प्रवाह की निगरानी को और सख़्त किया गया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इंटरपोल और विभिन्न विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया।
धोखाधड़ी वाले डोमेन और सर्वरों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा की गई।

क्षमता निर्माण

अधिकारियों को साइबर अपराध जांच और डिजिटल फॉरेंसिक में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
CERT-In और विशेष साइबर इकाइयों को और मज़बूत किया जाना चाहिए।

5. प्रमुख चुनौतियाँ

  • सीमापार लेन-देन की जटिलता, जहाँ धन कई खातों से होकर विदेशों में पहुँचता है
  • विभिन्न देशों के अलग-अलग कानूनों के कारण कानूनी प्रक्रिया में देरी
  • अपराधियों द्वारा कई नकली पहचान और छद्म नामों का उपयोग
  • नेटवर्क द्वारा लगातार सर्वर और तरीकों में बदलाव

6. निवारक उपाय और जन-जागरूकता
नागरिकों के लिए सुझाव

  • भुगतान करने से पहले वेबसाइट या पोर्टल की प्रामाणिकता की जाँच करें
  • वीज़ा या नौकरी के लिए अनौपचारिक चैनलों से बचें
  • किसी भी संदिग्ध पोर्टल या गतिविधि की रिपोर्ट साइबर हेल्पलाइन पर करें

संस्थागत कदम

  • बैंकों को KYC प्रक्रिया मज़बूत करने और म्यूल खातों की कड़ी निगरानी करने की सलाह
  • इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और डोमेन रजिस्ट्रार को धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों की पहचान और त्वरित कार्रवाई के निर्देश

7. प्रभाव

साइबर धोखाधड़ी अब अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का स्वरूप ले चुकी है।
भारत द्वारा की गई सक्रिय कार्रवाई—छापेमारी, गिरफ्तारी और वैश्विक सहयोग—अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नियंत्रण के लिए एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
लगातार जन-जागरूकता, संस्थागत मज़बूती और वैश्विक सहयोग ही इन नेटवर्कों पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।

8. मुख्य संदेश
अधिकारियों के लिए

खुफ़िया जानकारी साझा करें, फॉरेंसिक-आधारित जांच अपनाएँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करें।

नागरिकों के लिए

सतर्क रहें, किसी भी पोर्टल की विश्वसनीयता की जाँच करें और अनौपचारिक भुगतान चैनलों से दूर रहें।

संस्थानों के लिए

जागरूकता अभियान, प्रभावी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करें।