“डबल OTP सिस्टम” जो गुरुग्राम और पंचकूला में पायलट रूप से लागू किया गया है, वरिष्ठ नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाया गया है। इस प्रणाली में लेन-देन पूरा करने से पहले दो अलग-अलग वन टाइम पासवर्ड (OTP) की आवश्यकता होती है—एक खातेधारक को भेजा जाता है और दूसरा किसी विश्वसनीय परिजन को। यह व्यवस्था डिजिटल अरेस्ट जैसी सोशल इंजीनियरिंग धोखाधड़ी के विरुद्ध प्रभावी है, लेकिन इसकी व्यवहार्यता सुरक्षा, उपयोगिता, विस्तार क्षमता और नियामकीय संतुलन पर निर्भर करती है।
प्रक्रिया:
उद्देश्य: वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट जैसी दबाव आधारित धोखाधड़ी से बचाना।
मजबूतियाँ:
चुनौतियाँ:
RBI रिस्क-बेस्ड 2FA (2026)
ढाँचा: SMS OTP से आगे बढ़कर अनुकूलित प्रमाणीकरण अनिवार्य।
कारक:
मजबूतियाँ:
चुनौतियाँ:
डबल OTP सिस्टम क्या है?
पायलट लॉन्च: अप्रैल 2026 में हरियाणा पुलिस एवं HDFC बैंक द्वारा गुरुग्राम और पंचकूला में लागू।
प्रक्रिया:
लक्षित समूह: 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक।
उद्देश्य: धोखेबाज़ों द्वारा दबाव, भय या प्रतिरूपण के माध्यम से OTP साझा करवाने से रोकना।
व्यवहार्यता विश्लेषण
मजबूतियाँ:
चुनौतियाँ:
जोखिम एवं समाधान
डबल OTP सिस्टम वरिष्ठ नागरिकों के लिए दबाव आधारित धोखाधड़ी से बचाव हेतु प्रभावी है।
RBI रिस्क-बेस्ड 2FA (2026) पूरे देश के लिए दीर्घकालिक, विस्तार योग्य और उपयोगकर्ता अनुकूल समाधान है।
डबल OTP को एक विशेष सुरक्षा परत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि सार्वभौमिक विकल्प के रूप में।
Like on Facebook
Follow on Twitter
Follow on Instagram
Subscribe On YT