ठग विश्वसनीय कूरियर सेवाओं का भरोसा उठाकर परिवारों से नकली पार्सलों के लिए पैसे वसूल रहे हैं। जानिए यह स्कैम कैसे चलता है — और कैसे बचें।
अनचाहे पार्सल पहुंचते हैं: पीड़ितों को ऐसे पार्सल मिलते हैं जो उन्होंने कभी ऑर्डर नहीं किए, अक्सर किसी परिवारजन के नाम पर। ये असली कूरियर सेवाओं से भेजे जाते हैं ताकि भरोसा बने।
COD भुगतान की मांग: डिलीवरी करने वाला व्यक्ति पार्सल देने से पहले ₹500–₹1000 की नकद मांग करता है।
अंदर निकले नकली या बेकार सामान: खोलने पर पार्सल में सस्ते या बेकार चीजें होती हैं जैसे पील-ऑफ मास्क, प्लास्टिक एक्सेसरीज़ या खाली डिब्बे।
डेटा का दुरुपयोग: स्कैमर्स नाम और पते सोशल मीडिया या लीक हुए डेटाबेस से जुटाते हैं।
फिशिंग मैसेज: धोखाधड़ी वाले मैसेज दावा करते हैं कि एक पार्सल आपका इंतजार कर रहा है और लिंक पर क्लिक कर पता अपडेट करने को कहते हैं।
डेटा चोरी: लिंक पर क्लिक करने से व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चोरी हो सकती है।
कम राशि का COD जाल: लोग बिना जांचे ₹500–₹1000 दे देते हैं।
बड़े पैमाने पर निशाना: कुछ लोग भी भुगतान करें तो स्कैम फायदेमंद हो जाता है।
असली डिलीवरी चैनल स्कैम को विश्वसनीय बनाते हैं।
परिवारजन के नाम पर पार्सल भेजना स्वीकार्यता बढ़ाता है।
सफल डिलीवरी से पहचान और लोकेशन की पुष्टि होती है।
पते फिशिंग, सिम स्वैप या पहचान की चोरी में दोबारा इस्तेमाल होते हैं।
फर्जी इंडिया पोस्ट लिंक आधार, पैन या बैंक डिटेल चुरा सकते हैं।
पीड़ित अनजाने में मैलवेयर या धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।
यह एक व्यावसायिक लेन-देन जैसा दिखता है, जिससे ट्रेस करना मुश्किल होता है।
अक्सर शेल कंपनियों या नकली ई-कॉमर्स सेटअप से भेजा जाता है।
तत्कालता: COD में तुरंत भुगतान की मांग होती है।
भ्रम: परिवारजन के नाम पर पार्सल आने से लोग मना करने में हिचकते हैं।
भरोसा: ब्रांडेड कूरियर यूनिफॉर्म और पैकेजिंग से शक कम होता है।
वैधता का भ्रम: स्कैमर्स के पास निजी जानकारी होती है, जिससे डिलीवरी असली लगती है।
भौतिक डिलीवरी का फायदा: ऑनलाइन स्कैम की तुलना में यह असली डिलीवरी होती है, जिससे शक करना मुश्किल होता है।
टेक-सेवी पीड़ित भी फंसे हैं: युवा और जागरूक लोग भी इसका शिकार हुए हैं।
परिवार में जोखिम: बुजुर्ग या घरेलू स्टाफ बिना जांचे पार्सल स्वीकार कर सकते हैं।
भुगतान से पहले पुष्टि करें: COD पार्सल स्वीकार करने से पहले परिवार से जांच लें।
संदिग्ध डिलीवरी को मना करें: अगर आपने ऑर्डर नहीं किया है, तो न स्वीकारें, न भुगतान करें।
अधिकारियों को रिपोर्ट करें: शिकायत दर्ज करें cybercrime.gov.in पर।
लिंक पर क्लिक करने से बचें: इंडिया पोस्ट या कूरियर के नाम पर आए SMS या WhatsApp लिंक पर कभी क्लिक न करें।
इस चेतावनी को अपने परिवार, स्टाफ और समुदाय में साझा करें। जागरूकता ही सुरक्षा है।
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