गुरुग्राम में महिला की गिरफ्तारी – चीन-आधारित साइबर धोखेबाज़ों की मदद करने के आरोप में।
वह अपने पति के साथ किराए के मकान से एक वर्चुअल SIM बॉक्स चला रही थी।
पहले भी गुरुग्राम और देश के अन्य स्थानों से SIM बॉक्स एक्सचेंज पकड़े गए हैं, जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इन्वेस्टमेंट स्कैम करने का बड़ा जरिया बने।
आवश्यकता है कि स्थानीय पुलिस को प्रशिक्षित किया जाए ताकि वे ऐसे इंस्टॉलेशन की पहचान कर सकें और DoT को सिम बॉक्स के दुरुपयोग पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।
दूरसंचार विभाग (DoT) सक्रिय रूप से AI-संचालित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है ताकि साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले SIM बॉक्स एक्सचेंज का पता लगाया जा सके और उन्हें समाप्त किया जा सके, परंतु इसे और तेज़ गति देकर इन गतिविधियों में SIM बॉक्स का इस्तेमाल रोकना आवश्यक है।
AI कैसे SIM बॉक्स एक्सचेंज का पता लगाता है
1. कॉल पैटर्न विश्लेषण
2. IMEI और डिवाइस फिंगरप्रिंटिंग
3. जियो-लोकेशन और टॉवर मैपिंग
4. ट्रैफिक प्रोफाइलिंग
5. क्रॉस-नेटवर्क कोरिलेशन
6. धोखाधड़ी का पता लगाने वाले अलर्ट
भारत में प्रवर्तन
निष्कर्ष
AI DoT को SIM बॉक्स एक्सचेंज का पता लगाने में मदद करता है, कॉल रिकॉर्ड, डिवाइस फिंगरप्रिंट, जियो-लोकेशन असंगतियों और ट्रैफिक पैटर्न का विश्लेषण करके। यह सक्रिय पहचान अधिकारियों को धोखाधड़ी वाले SIM ब्लॉक करने और सीमा-पार साइबर अपराध नेटवर्क को समाप्त करने में सक्षम बनाती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों, DoT और आम नागरिकों को मिलकर SIM बॉक्स से कॉल रूटिंग के खिलाफ एकजुट होकर इसे खत्म करना चाहिए।
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