डेबिट फ्रीज़ और लियन से जुड़े मुख्य प्रावधान
समय सीमा
यदि कोई न्यायालय आदेश या बहाली का निर्देश उपलब्ध नहीं है, तो बैंक को 90 दिनों के भीतर डेबिट फ्रीज़ या लियन हटाना अनिवार्य होगा।
छोटे मूल्य के धोखाधड़ी मामले
₹50,000 से कम की धोखाधड़ी में, बिना न्यायालय आदेश के तत्काल धनवापसी की जा सकती है, ताकि पीड़ितों को अनावश्यक कठिनाई न हो।
न्यायिक पर्यवेक्षण
यदि सक्षम न्यायालय BNSS या अन्य लागू कानूनों के तहत निर्देश देता है, तो फ्रीज़ तब तक जारी रहेगा जब तक मामला निपट नहीं जाता।
पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण
SOP यह सुनिश्चित करता है कि फ्रीज़ मनमाना या अनिश्चितकालीन न हो, जिससे पीड़ितों और गलत तरीके से प्रभावित खाता धारकों दोनों की सुरक्षा हो।
पृष्ठभूमि और उद्देश्य
NCRP (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल)
2019 में प्रारंभ किया गया, ताकि नागरिक ऑनलाइन माध्यम से साइबर अपराध रिपोर्ट कर सकें।
CFCFRMS (नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली)
2021 में शुरू की गई यह प्रणाली पुलिस, बैंक और वित्तीय मध्यस्थों को वास्तविक समय में जोड़कर धोखाधड़ी रोकने में सहायक है।
SOP का उद्देश्य
साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों (CEFCs) से निपटने हेतु समान, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रियाएँ स्थापित करना तथा अपराध रोकथाम और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना।
उपलब्धियाँ और आवश्यकता
रिपोर्टेड राशि (अप्रैल 2021 – नवम्बर 2025)
₹52,969 करोड़
धोखेबाज़ों से बचाई गई राशि
₹7,647 करोड़
पीड़ितों को लौटाई गई राशि
₹167 करोड़ (लगभग 2.18%)
पहचानी गई कमी
पीड़ित राहत में सुधार हेतु सरल, त्वरित और प्रभावी अंतरिम कस्टडी एवं बहाली प्रक्रियाओं की आवश्यकता।
SOP के प्रमुख उद्देश्य
SOP का दायरा
मार्गदर्शक सिद्धांत
कानूनी आधार
BNSS की धाराएँ 94, 106, 168; CrPC के समकक्ष प्रावधान; BUDS अधिनियम; PMLA से संबंधित प्रावधान।
सावधानी
केवल वास्तविक CEFC शिकायतों को आगे बढ़ाया जाए; झूठी या प्रेरित शिकायतों को हतोत्साहित किया जाए।
वास्तविक समय कार्रवाई
बैंक NCRP के साथ API एकीकरण के माध्यम से तुरंत “पुट-ऑन-होल्ड” कार्रवाई करें।
AML/CFT अनुपालन
उन्नत सावधानी (EDD) अनिवार्य; RBI परिपत्रों का पूर्ण पालन आवश्यक।
शिकायत निवारण
पीड़ित बैंक या वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं; तय समय सीमा में समाधान अनिवार्य।
जवाबदेही
जांच अधिकारी (IOs) और कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ (LEAs) अनावश्यक फ्रीज़ से बचें; न्यायिक संरक्षण को प्रोत्साहित किया गया है।
पीड़ित-प्रथम सिद्धांत
वास्तविक पीड़ितों को अंतरिम कस्टडी प्रदान की जाए; अनेक पीड़ितों की स्थिति में समानुपातिक वितरण किया जाए।
पारदर्शिता
प्रत्येक चरण पर पीड़ितों और बैंकों को SMS एवं ईमेल द्वारा सूचना दी जाए।
शिकायत पंजीकरण प्रक्रिया
NCRP (ऑनलाइन पोर्टल)
पीड़ित द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण → स्वीकृति → पुलिस सत्यापन → CFCFRMS को अग्रेषण → बैंक/वित्तीय संस्थाओं को नोटिस → आवश्यकता अनुसार FIR या e-FIR।
हेल्पलाइन 1930
पीड़ित कॉल करता है → पुलिस विवरण दर्ज करती है → CFCFRMS पर टिकट बनता है → स्वीकृति → पीड़ित NCRP पर पूर्ण विवरण प्रस्तुत करता है।
बैंक के माध्यम से
बैंक अपने ग्राहकों की ओर से NCRP पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
पुलिस स्टेशन
पुलिस स्टेशन सीधे CFCFRMS पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
प्रमुख हितधारक
बैंक
वाणिज्यिक, सहकारी, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, RRBs, LABs।
नियामक संस्थाएँ
RBI, SEBI, NABARD, PFRDA, IRDAI, DFS।
अन्य संस्थाएँ
PSOs, PGs, PAs, NBFCs, BCs, LSPs, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म, क्रिप्टो एक्सचेंज।
कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ
सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, I4C (MHA)।
उद्योग निकाय
भारतीय बैंक संघ (IBA), NPCI।
पीड़ित संरक्षण और धन बहाली
अंतरिम कस्टडी के प्रावधान
अप्राप्त धन
निर्धारित तंत्र के माध्यम से निपटान।
कई पीड़ितों की स्थिति
धन के मिश्रण की स्थिति में समानुपातिक वितरण।
शिकायत निवारण तंत्र
सभी शिकायतों का निस्तारण तय समय सीमा में किया जाना अनिवार्य है।
गलत फ्रीज़ या लियन को तुरंत सुधारा जाएगा, जिससे बैंक और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो।
सारांश
यह SOP एक पीड़ित-केंद्रित, कानूनी रूप से अनुपालन योग्य, पारदर्शी और जवाबदेह ढाँचा स्थापित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि:
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