डॉक्सिंग: किसी व्यक्ति की निजी जानकारी—जैसे घर का पता, फ़ोन नंबर या कार्यस्थल—को बिना अनुमति सार्वजनिक रूप से उजागर करने की दुर्भावनापूर्ण क्रिया है। इसका उद्देश्य अक्सर उत्पीड़न, डराना-धमकाना या नुकसान पहुँचाना होता है। यह एक गंभीर साइबर खतरा है जो वास्तविक जीवन में पीछा करने, धोखाधड़ी और पहचान चोरी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। “डिजिटल अरेस्ट” घोटाले अक्सर डॉक्सिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें पीड़ितों के निजी डेटा—पासपोर्ट विवरण, इमिग्रेशन रिकॉर्ड या पारिवारिक जानकारी—को उजागर करना या उजागर करने की धमकी देना शामिल होता है, ताकि डर और दबाव बढ़े और लोग उनकी बात मानने पर मजबूर हों। यह तरीका दक्षिण-पूर्व एशिया और अमेरिका में प्रवासी समुदायों के बीच व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act, 2023) भले ही “डॉक्सिंग” शब्द का प्रयोग नहीं करता, लेकिन यह व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग—जैसे नाम, पता, फ़ोन नंबर या अन्य पहचानकर्ताओं का बिना अनुमति खुलासा—को सीधे कवर करता है। इस तरह डॉक्सिंग भारत के नए डेटा गोपनीयता कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
डॉक्सिंग का अर्थ
• परिभाषा: किसी व्यक्ति या संगठन की पहचान योग्य जानकारी (PII) को बिना अनुमति ऑनलाइन प्रकाशित करना।
• उत्पत्ति: “ड्रॉपिंग डॉक्स” (दस्तावेज़) से निकला शब्द।
• रूप:
• उद्देश्य: उत्पीड़न, वसूली, ऑनलाइन शर्मिंदा करना या तथाकथित “न्याय।”
जोखिम और परिणाम
खुद को कैसे सुरक्षित रखें
DPDP Act में डॉक्सिंग
• व्यक्तिगत डेटा संरक्षण: किसी भी पहचान योग्य डेटा का बिना अनुमति प्रकाशन अवैध है।
• सहमति आवश्यक: डेटा संग्रह, प्रोसेसिंग या साझा करने के लिए स्पष्ट सहमति ज़रूरी।
• व्यक्तिगत अधिकार:
• डेटा फ़िड्यूशियरी की ज़िम्मेदारी:
दंड और प्रवर्तन
पीड़ित क्या करें
डॉक्सिंग केवल ऑनलाइन परेशानी नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन पर असर डालने वाली साइबर अपराध रणनीति है। भारत में पीड़ितों को तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर कॉल करना चाहिए या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
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