डिवाइस ब्लॉकिंग साइबर घोटालों के खिलाफ अग्रिम पंक्ति की रक्षा है। यह सिम बॉक्स आधारित धोखाधड़ी को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह धोखेबाज़ों के उपकरणों को बंद कर देती है, पीड़ितों की सुरक्षा करती है और जांच को मजबूत बनाती है।
हाल ही में भारत सरकार ने व्हाट्सऐप को निर्देश दिया है कि वह “डिजिटल अरेस्ट” घोटालों से जुड़े डिवाइस आईडी को ब्लॉक करे — केवल अकाउंट स्तर पर प्रतिबंध लगाने से आगे बढ़कर हार्डवेयर स्तर पर रोक लगाए। इसका उद्देश्य यह है कि धोखेबाज़ अकाउंट निलंबित होने के बाद नए अकाउंट बनाकर वापस न आ सकें।
डिवाइस ब्लॉकिंग क्यों महत्वपूर्ण है
प्रमुख ब्लॉकिंग तंत्र
1. सिम ब्लॉकिंग
दूरसंचार कंपनियाँ धोखाधड़ी से जुड़े सिम को निष्क्रिय करती हैं।
सिम स्वैप धोखाधड़ी, ओटीपी दुरुपयोग या बल्क सिम बॉक्स मामलों में आवश्यक।
2. IMEI ब्लॉकिंग
CEIR के माध्यम से ब्लैकलिस्ट करने पर चोरी/दुरुपयोग किए गए उपकरण किसी भी भारतीय नेटवर्क से जुड़ नहीं पाते।
सिम बॉक्स घोटालों को रोकता है: प्रत्येक सिम बॉक्स का एक विशिष्ट IMEI होता है। CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) के माध्यम से इन IMEI को ब्लैकलिस्ट करने पर वे किसी भी भारतीय नेटवर्क से जुड़ नहीं पाते।
3. अकाउंट ब्लॉकिंग
बैंक और भुगतान प्लेटफ़ॉर्म धोखाधड़ी वाले अकाउंट को फ्रीज़ करते हैं ताकि धन siphon न हो सके।
4. ऐप/प्लेटफ़ॉर्म ब्लॉकिंग
मैसेजिंग ऐप, वॉलेट और सोशल मीडिया धोखाधड़ी से जुड़े अकाउंट को निलंबित करते हैं ताकि फ़िशिंग और नकली प्रोफ़ाइल का प्रसार रुके।
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