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भारत का DPDP फ्रेमवर्क और नागरिकों की गोपनीयता: गैर-डिजिटल डेटा का अंधा क्षेत्र जो डिजिटल विभाजन को गहरा कर रहा है
1. गैर-डिजिटल डेटा को शामिल नहीं करना
- DPDP अधिनियम, 2023 और नियम, 2025 केवल डिजिटल व्यक्तिगत डेटा पर लागू होते हैं।
- अस्पतालों, बैंकों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों की फाइलें व रजिस्टर इसके दायरे से बाहर हैं।
- परिणामस्वरूप, लाखों नागरिकों के गोपनीयता अधिकार असुरक्षित रहते हैं।
2. डिजिटल विभाजन और असमानता
- ग्रामीण क्षेत्रों और सार्वजनिक सेवाओं में अभी भी मैनुअल रिकॉर्ड-कीपिंग पर निर्भरता है।
- गैर-डिजिटल डेटा को बाहर रखकर कानून कमजोर वर्गों को गोपनीयता सुरक्षा से वंचित करता है।
3. कानूनी सुरक्षा का विखंडन
- पुराने SPDI नियम, 2011 (Reasonable Security Practices and Procedures and Sensitive Personal Data or Information Rules, 2011) संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को व्यापक रूप से कवर करते थे।
- DPDP फ्रेमवर्क डिजिटल सुरक्षा को आधुनिक बनाता है, लेकिन गैर-डिजिटल संदर्भों में निरंतरता छोड़ देता है।
- इससे संस्थानों में भ्रम और असमान प्रवर्तन पैदा होता है।
4. संचालन संबंधी चुनौतियाँ
- स्वास्थ्य क्षेत्र: ग्रामीण क्लीनिकों की मरीज फाइलें असुरक्षित।
- बैंकिंग: पासबुक आधारित खाते और मैनुअल लेजर बाहर।
- शिक्षा: छात्र रजिस्टर कवर नहीं होते।
- संस्थानों को दोहरी अनुपालन का बोझ उठाना पड़ता है।
5. कमज़ोर प्रवर्तन तंत्र
- DPDP फ्रेमवर्क डिजिटल सहमति और शिकायत निवारण प्रणाली पर निर्भर है।
- जिन नागरिकों के पास डिजिटल साक्षरता या पहुँच नहीं है, वे अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकते।
- इससे के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में मान्यता प्राप्त संवैधानिक गोपनीयता अधिकार कमजोर पड़ते हैं।
नागरिकों पर प्रभाव
- गोपनीयता शून्य: भौतिक रिकॉर्ड वाले नागरिकों के पास कोई लागू अधिकार नहीं।
- संस्थागत भ्रम: दोहरी अनुपालन से अक्षमता बढ़ती है।
- बहिष्कार: कमजोर वर्ग गोपनीयता सुरक्षा से बाहर रहते हैं।
- कानूनी असंगति: भारत वैश्विक मानकों (जैसे GDPR) से पीछे रह जाता है।
नागरिक-केंद्रित सुधार सुझाव
- दायरा बढ़ाएँ: DPDP को गैर-डिजिटल व्यक्तिगत डेटा तक विस्तारित करें।
- हाइब्रिड अनुपालन मॉडल: डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड पर समान गोपनीयता मानक लागू हों।
- क्षमता निर्माण: ग्रामीण व पुराने संस्थानों को सुरक्षित डिजिटल प्रणाली अपनाने के लिए प्रशिक्षित करें।
- नागरिक सशक्तिकरण: शिकायत निवारण तंत्र को गैर-डिजिटल उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुलभ बनाना चाहिए।
संक्षेप में:
DPDP फ्रेमवर्क डिजिटल गोपनीयता को आधुनिक बनाता है, लेकिन गैर-डिजिटल रिकॉर्ड के लिए खतरनाक अंधा क्षेत्र छोड़ देता है। इस कमी को दूर करना भारत में सभी नागरिकों के लिए संवैधानिक गोपनीयता अधिकार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
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