भारत में दूरसंचार कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट समर्थित उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें “डिजिटल अरेस्ट” घोटालों और अन्य साइबर धोखाधड़ी मामलों में संदिग्ध सिम कार्ड को 2–3 घंटे के भीतर ब्लॉक करने की बात कही गई थी। उनका कहना है कि इससे असली ग्राहकों को असुविधा हो सकती है। इसके बजाय, उन्होंने केवल दिन में दो बार डिसकनेक्शन करने पर सहमति जताई है, जो वास्तविक समय ब्लॉकिंग से काफी कम है।
क्यों टेलीकॉम कंपनियाँ 2–3 घंटे में ब्लॉकिंग का विरोध करती हैं
सारांश
साइबर अपराध नियंत्रण पर प्रभाव
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