सरकार ने आगामी सत्र में संसद में एक विधेयक लाने का संकेत दिया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट मैकेनिज़्म और डीपफेक से जुड़े अपराधों को संबोधित किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद उठाया गया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या वर्तमान दंड कानून इन उभरते अपराधों को पर्याप्त रूप से परिभाषित करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ
सरकार का रुख
सरकार ने कोर्ट की चिंता को स्वीकार किया और आगामी सत्र में विधेयक लाने की संभावना जताई है, जिसमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल हो सकते हैं—
विधेयक में संभावित प्रमुख प्रावधान
1. डिजिटल अरेस्ट की परिभाषा
2. डीपफेक का विनियमन
3. मौजूदा कानूनों के साथ सामंजस्य
संभावित प्रभाव
सरकार का यह प्रस्ताव भारत के दंड कानून ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि कानून तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखें और उभरते साइबर खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकें।
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