डिजिटल अरेस्ट एवं डीपफेक अपराधों पर नया कानून: संसद में विधेयक लाने की तैयारी

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डिजिटल अरेस्ट एवं डीपफेक अपराधों पर नया कानून: संसद में विधेयक लाने की तैयारी

सरकार ने आगामी सत्र में संसद में एक विधेयक लाने का संकेत दिया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट मैकेनिज़्म और डीपफेक से जुड़े अपराधों को संबोधित किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद उठाया गया है, जिसमें पूछा गया था कि क्या वर्तमान दंड कानून इन उभरते अपराधों को पर्याप्त रूप से परिभाषित करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ

  • कोर्ट ने मौजूदा दंड प्रावधानों में खामियों की ओर इशारा किया।
  • डीपफेक निर्माण, प्रसार और डिजिटल टूल्स के दुरुपयोग जैसे अपराध स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं।
  • सवाल उठाया गया कि क्या IPC और अन्य कानून इन तकनीकी अपराधों को कवर करते हैं या नए प्रावधानों की आवश्यकता है।

सरकार का रुख

सरकार ने कोर्ट की चिंता को स्वीकार किया और आगामी सत्र में विधेयक लाने की संभावना जताई है, जिसमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल हो सकते हैं—

  • डिजिटल अरेस्ट की परिभाषा (तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता पर रोक, प्राधिकरण का प्रतिरूपण, ऑनलाइन अवैध हिरासत)।
  • डीपफेक के दुरुपयोग को अपराध घोषित करना (धोखाधड़ी, मानहानि, उत्पीड़न एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे)।
  • अपराध की गंभीरता के अनुसार स्पष्ट दंड प्रावधान निर्धारित करना।

विधेयक में संभावित प्रमुख प्रावधान
1. डिजिटल अरेस्ट की परिभाषा

  • ऑनलाइन अवैध हिरासत और प्राधिकरण का प्रतिरूपण।
  • निजी संस्थाओं द्वारा संभावित दुरुपयोग से सुरक्षा।

​​​​​​​2. डीपफेक का विनियमन

  • डीपफेक को AI आधारित सिंथेटिक मीडिया के रूप में परिभाषित करना।
  • धोखाधड़ी, ब्लैकमेल, यौन उत्पीड़न, गलत सूचना एवं राजनीतिक हेरफेर में दुरुपयोग पर दंड।
  • प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तथा आपत्तिजनक सामग्री को त्वरित हटाने की व्यवस्था।

3. मौजूदा कानूनों के साथ सामंजस्य

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ समन्वय।
  • डेटा सुरक्षा एवं गोपनीयता संबंधी कानूनी ढांचे के अनुरूप प्रावधान।

संभावित प्रभाव

  • कानूनी स्पष्टता: नागरिकों एवं प्रवर्तन एजेंसियों को अपराधों की स्पष्ट परिभाषा प्राप्त होगी।
  • निवारक प्रभाव: कठोर दंड प्रावधान डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में सहायक होंगे।
  • न्यायिक समन्वय: सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान संभव होगा।
  • कार्यान्वयन की चुनौतियाँ: क्षमता निर्माण, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञता तथा व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता बनी रहेगी।

सरकार का यह प्रस्ताव भारत के दंड कानून ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि कानून तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखें और उभरते साइबर खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकें।