‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी पर रोक: सरकार की बहु-स्तरीय रणनीति और नई तकनीकी पहल

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‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी पर रोक: सरकार की बहु-स्तरीय रणनीति और नई तकनीकी पहल

माननीय सर्वोच्च न्यायालय में गृह मंत्रालय द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट में ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी रोकने की बड़ी योजना प्रस्तुत की गई है।
बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम (BIVS) 9 महीने में, यानी दिसंबर 2026 तक ऑपरेशनल हो जाएगा।
व्हाट्सएप एआई/एमएल आधारित पहचान प्रणाली लागू करेगा।

‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी में अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण कर नागरिकों को झूठे आरोपों से डराते हैं और उनसे धन वसूलते हैं।
व्हाट्सएप इन धोखाधड़ियों का प्रमुख माध्यम रहा है, जहाँ आधिकारिक लोगो का दुरुपयोग और एन्क्रिप्टेड संचार का इस्तेमाल कर अपराधी पकड़े जाने से बचते हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को इन अपराधों को रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

स्थिति रिपोर्ट:
अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणि द्वारा गृह मंत्रालय (MHA) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की ओर से दाखिल रिपोर्ट में निम्नलिखित संस्थाओं के सहयोग से कदमों का उल्लेख किया गया है:

  • दूरसंचार विभाग (DoT)
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
  • सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • टेलीकॉम सेवा प्रदाता
  • व्हाट्सएप

व्हाट्सएप की एआई/एमएल पहचान प्रणाली:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग कर आधिकारिक पहचान का दुरुपयोग रोका जाएगा।
  • मीडिया-मैचिंग सिस्टम द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण करने वाले खातों को हटाया जाएगा।
  • पहचान एल्गोरिद्म को लगातार बेहतर बनाया जाएगा।

सरकारी एवं संस्थागत कदम:

  • बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम (BIVS): सिम कार्ड जारी करने से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य। लक्ष्य: दिसंबर 2026 तक लागू करना।
  • टेलीकॉम समन्वय: धोखाधड़ी खातों को ट्रेस और ब्लॉक करने हेतु सेवा प्रदाताओं के बीच सहयोग।
  • वित्तीय सुरक्षा: RBI द्वारा संदिग्ध लेन-देन की निगरानी।
  • नागरिक संरक्षण: जागरूकता अभियान और साइबर अपराध रिपोर्टिंग तंत्र का I4C से एकीकरण।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए महत्व:

  • संचालन सहयोग: एआई आधारित पहचान उपकरण धोखाधड़ी खातों की पूर्व पहचान कर जांच का बोझ घटाते हैं।
  • कानूनी आश्वासन: सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी से जवाबदेही और नीति अनुकूलन सुनिश्चित।
  • अंतर-एजेंसी सहयोग: कानून प्रवर्तन, टेलीकॉम, वित्तीय नियामक और तकनीकी प्लेटफॉर्म के बीच तालमेल मजबूत।
  • नागरिक विश्वास: डिजिटल सुरक्षा और कानून प्रवर्तन की विश्वसनीयता में वृद्धि।

यह स्थिति रिपोर्ट तकनीक, विनियमन और प्रवर्तन को जोड़कर ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी से निपटने की बहु-हितधारक रणनीति को दर्शाती है। व्हाट्सएप की एआई आधारित लोगो पहचान, बायोमेट्रिक सिम सत्यापन और वित्तीय निगरानी नागरिकों की सुरक्षा और भारत की साइबर अपराध प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।