भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 संगठित अपराध से संबंधित है और यह भारत में साइबर अपराध से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है। यह प्रावधान जबरन वसूली, साइबर अपराध, कॉल सेंटर धोखाधड़ी, डिजिटल गिरफ्तारी, ट्रेडिंग और निवेश घोटाले जैसे निरंतर अवैध कार्यों को अपराध घोषित करता है तथा कठोर दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान करता है।
म्यूल बैंक खाते साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की रीढ़ बन चुके हैं। पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस का ऑपरेशन म्यूल हंट इन खातों के माध्यम से चल रहे ऑनलाइन घोटालों की बैंकिंग संरचना को उजागर कर रहा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना ही संगठित साइबर अपराध को रोकने की कुंजी है।
पुलिस ने पाया कि कई खाते वेब डेवलपमेंट एजेंसियों या रियल एस्टेट कंपनियों के नाम पर खोले गए हैं, जो केवल कागज़ पर मौजूद हैं। इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त धन को जमा करने और निकालने के लिए किया जाता है।
चाहे अपराधी शेयर बाज़ार लाभ, डिजिटल गिरफ्तारी, पार्ट-टाइम नौकरी या वैवाहिक धोखाधड़ी की कहानी गढ़ें—हर साइबर धोखाधड़ी का आधार यही बैंक खाते होते हैं।
अब पुलिस इन खाताधारकों पर संगठित अपराध की कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है। ऑपरेशन म्यूल हंट का उद्देश्य इन खातों की पहचान करना, उन्हें फ्रीज़ करना और पूरे देश में अभियोजन चलाना है।
I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) से मिली जानकारी के आधार पर केवल तीन दिनों में 15 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और समन्वय पोर्टल के डेटा विश्लेषण पर आधारित है, जिनमें देशभर से शिकायतें और वित्तीय खुफिया जानकारी एकत्र होती है।
साइबर अपराध केवल तकनीकी धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह संगठित अपराध का हिस्सा है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 हमें इन नेटवर्कों की रीढ़ तोड़ने का कानूनी आधार देती है।
पुलिस की कार्रवाई, नागरिकों की सतर्कता और वित्तीय नेटवर्क की निगरानी—यही तीन स्तंभ हैं जो भारत को सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर ले जाएंगे।
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