भारत में साइबर अपराध मामलों के पंजीकरण में तेज़ वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2026 में 86,420 मामले दर्ज किए, जो 2021 के 52,974 मामलों से कहीं अधिक हैं। यह वृद्धि वित्तीय धोखाधड़ी, "डिजिटल गिरफ्तारी" ठगी, फ़िशिंग और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से प्रेरित है। यह प्रवृत्ति बढ़ते साइबर खतरों और बेहतर रिपोर्टिंग तंत्र दोनों को दर्शाती है।
प्रमुख आँकड़े
वृद्धि के पीछे कारण
1. डिजिटल अपनापन और ऑनलाइन लेन-देन
2. वित्तीय ठगी और "डिजिटल गिरफ्तारी" धोखाधड़ी
3. सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म
4. बेहतर रिपोर्टिंग और जागरूकता
5. वैश्विक राजनीतिक और तकनीकी कारक
जोखिम और चुनौतियाँ
सिफ़ारिशें
निष्कर्ष: भारत में साइबर अपराध पंजीकरण में वृद्धि डिजिटल धोखाधड़ी और बेहतर रिपोर्टिंग तंत्र दोनों का परिणाम है। वित्तीय ठगी, डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी और फ़िशिंग प्रमुख हैं, जिनमें कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे शहरी राज्यों में शिकायतें सबसे अधिक हैं। यह प्रवृत्ति मज़बूत साइबर पुलिसिंग, जागरूकता अभियानों और प्रणालीगत सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
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