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भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर बहस: आरबीआई का कड़ा विरोध, ICAI का नियामित ढांचे का समर्थन

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

  • आरबीआई के गवर्नर श्री संजय मल्होत्रा ने संसदीय वित्त स्थायी समिति को बताया कि क्रिप्टो संपत्तियाँ भारत के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।
  • आरबीआई का स्पष्ट रुख “नहीं” है। वैधीकरण के लिए कोई समर्थन नहीं है, भले ही विभिन्न लॉबी समूह इसकी वैधता की मांग कर रहे हों।

प्रमुख चिंताएँ

• अपराध वित्तपोषण:
क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग अंतरराष्ट्रीय अपराधों, जैसे ड्रग तस्करी और आतंकवाद के वित्तपोषण, में किया जा सकता है।

• नियामक चुनौतियाँ:
वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को नियंत्रित करना कठिन है, विशेषकर जब उनका व्यापार ऑफशोर संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है।

• आर्थिक जोखिम:
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिरता वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

• वैश्विक संदर्भ:
चीन जैसे देशों ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

ICAI का विपरीत दृष्टिकोण
1. रणनीतिक अवसर

  • भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) का मानना है कि VDA भारत की डिजिटल अवसंरचना, फिनटेक नवाचार और वैश्विक सेवाओं में नेतृत्व की क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।
  • ICAI ने एक व्यापक VDA कानून बनाने की आवश्यकता बताई है, जिसमें जारी करना (Issuance), ट्रेडिंग, कस्टडी तथा निवेशकों की सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान शामिल हों।

2. संभावित लाभ

• सीमा-पार भुगतान:
VDA और ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से रेमिटेंस अधिक तेज़, कम लागत वाले और पारदर्शी हो सकते हैं, जो UPI के पूरक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

• वैश्विक केंद्र बनने की संभावना:
भारत अपनी मजबूत भुगतान अवसंरचना के आधार पर वैश्विक डिजिटल भुगतान केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

• नवाचार को बढ़ावा:
भारत की सशक्त सॉफ्टवेयर प्रतिभा और स्टार्टअप इकोसिस्टम ब्लॉकचेन एप्लिकेशन, DeFi तकनीक और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट प्लेटफ़ॉर्म के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संसदीय समिति की टिप्पणियाँ

  • समिति के अध्यक्ष भृतृहरि महताब ने स्पष्ट किया कि क्रिप्टोकरेंसी के वैधीकरण पर आरबीआई का रुख पूरी तरह “नहीं” है।
  • सांसदों ने यह भी उल्लेख किया कि आरबीआई की सतर्क नीति और ICAI के आशावादी दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
  • यह बहस भारत के सामने मौजूद उस चुनौती को दर्शाती है जिसमें सुरक्षा जोखिमों और तकनीकी नवाचार के अवसरों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

भारत के लिए निहितार्थ

• नीति की दिशा:
आरबीआई का रुख संकेत देता है कि निकट भविष्य में भारत में क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाने की संभावना कम है।

• नियामक अंतराल:
ICAI का सुझाव इस बात को रेखांकित करता है कि स्पष्ट और व्यापक कानून की आवश्यकता है, ताकि नियामकीय अस्पष्टता (Grey Area) समाप्त हो सके।

• वैश्विक स्थिति:
भारत को यह तय करना होगा कि वह चीन की तरह प्रतिबंधात्मक मॉडल अपनाए या यूरोपीय संघ की तरह सख्त नियमन के साथ नवाचार को बढ़ावा देने वाला मॉडल विकसित करे।

निष्कर्ष

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और वित्तीय जोखिमों को देखते हुए क्रिप्टोकरेंसी के वैधीकरण का स्पष्ट विरोध किया है। दूसरी ओर, ICAI का मानना है कि एक सुदृढ़ नियामित ढांचा तैयार कर भारत डिजिटल परिसंपत्तियों और ब्लॉकचेन आधारित नवाचारों से रणनीतिक लाभ प्राप्त कर सकता है। यह नीति-बहस आने वाले समय में तय करेगी कि भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में सतर्क नियामक की भूमिका निभाएगा या नियंत्रित नवाचार के माध्यम से एक अग्रणी डिजिटल केंद्र के रूप में उभरेगा।

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Key Takeaways

Sources & References

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