बैंक खाते फ्रीज़ करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला

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बैंक खाते फ्रीज़ करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला

1. पृष्ठभूमि

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाल ही में यह प्रश्न विचाराधीन लिया कि क्या बैंक केवल पुलिस के अनुरोध पर ग्राहक के बैंक खाते फ्रीज़ कर सकते हैं।
  • यह मामला एक मेडिकल स्टोर चेन द्वारा दायर याचिका से उत्पन्न हुआ, जिसका एक्सिस बैंक खाता राचकोंडा पुलिस (हैदराबाद) द्वारा जारी डेबिट फ्रीज़ नोटिस के बाद फ्रीज़ कर दिया गया था।
  • पुलिस का आरोप था कि साइबर अपराध के एक पीड़ित के खाते से धोखाधड़ी द्वारा स्थानांतरित धनराशि याचिकाकर्ता के खाते में पहुँची थी।

2. न्यायालय की टिप्पणियाँ

(क) कानूनी प्रक्रिया की अनिवार्यता

  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस के अनुरोध के आधार पर बैंक खाते फ्रीज़ नहीं किए जा सकते।
  • इसके लिए विधि द्वारा निर्धारित उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

(ख) नागरिक और आपराधिक दायित्व

  • यदि बैंक बिना विधिक प्रक्रिया के खातों को फ्रीज़ करते हैं, तो उनके विरुद्ध नागरिक एवं आपराधिक दोनों प्रकार की कार्रवाई संभव है।

(ग) पुलिस नोटिस में कमियाँ

  • एक्सिस बैंक को जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि कितनी राशि फ्रीज़ की जानी है।
  • बार-बार अनुरोध के बावजूद जाँच अधिकारी द्वारा एफआईआर की प्रति या कोई औपचारिक जब्ती आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया।

3. न्यायालय का निर्णय

  • हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के बैंक खाते को डी-फ्रीज़ करने का आदेश दिया।
  • साथ ही, प्रक्रिया के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु निम्न दिशा-निर्देश जारी किए:
  • खाते को फ्रीज़ करने की सूचना तुरंत संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रणाली के नोडल अधिकारी को दी जाए।
  • बैंक केवल तभी कार्रवाई करें जब उचित कानूनी दस्तावेज, जैसे एफआईआर, जब्ती आदेश या न्यायिक निर्देश, प्रस्तुत किए जाएँ।

4. निर्णय के प्रभाव

(क) बैंकों के लिए

  • खाते फ्रीज़ करने से पूर्व अतिरिक्त सावधानी बरतना और वैध दस्तावेजों की माँग करना अनिवार्य होगा।
  • प्रक्रिया का पालन न करने पर बैंकों को मुकदमेबाज़ी और कानूनी दायित्व का सामना करना पड़ सकता है।

(ख) पुलिस के लिए

  • जाँच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नोटिस एनसीआरपी शिकायतों, एफआईआर, जब्ती आदेश या न्यायिक निर्देशों से विधिवत समर्थित हों।
  • अस्पष्ट, अधूरे या दस्तावेज-विहीन नोटिस विधिक रूप से मान्य नहीं माने जाएँगे।

(ग) नागरिकों के लिए

  • व्यक्तियों और संगठनों को मनमाने ढंग से खाते फ्रीज़ किए जाने से संरक्षण मिलेगा।
  • विधिक प्रक्रिया का पालन न होने की स्थिति में वे अदालत में इसे चुनौती दे सकते हैं।

5. व्यापक महत्व

  • यह निर्णय वित्तीय जाँचों में विधिक प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
  • यह साइबर अपराध मामलों में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है।
  • यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों के बीच जवाबदेही एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करता है।

6. मुख्य निष्कर्ष

  • केवल पुलिस के अनुरोध पर बैंक खाते फ्रीज़ नहीं किए जा सकते।
  • उचित और वैध कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हैं।
  • मनमाना खाता फ्रीज़ करना बैंकों के लिए नागरिक और आपराधिक दायित्व का कारण बन सकता है।
  • नागरिकों के पास अवैध खाता फ्रीज़ किए जाने के विरुद्ध प्रभावी न्यायिक उपाय उपलब्ध हैं।
  • यह निर्णय साइबर अपराध से जुड़ी वित्तीय जाँचों में प्रक्रिया की अखंडता को सुदृढ़ करता है।