पृष्ठभूमि
बढ़ती चिंताओं जैसे स्क्रीन की लत, साइबर खतरों और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री के जवाब में, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्यों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। उद्देश्य नाबालिगों को सुरक्षित करना है, लेकिन इस कदम ने भारत के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों के बीच इसकी व्यवहार्यता, वैधता और प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
प्रस्ताव की रूपरेखा
कर्नाटक
आंध्र प्रदेश
• आयु सीमा:
• समयसीमा: 90 दिनों के भीतर लागू करने की योजना।
• प्रस्तावक: आईटी एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश, घोषणा मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा विधानसभा में।
• तर्क: बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाना, जैसे अनुचित सामग्री का सामना और लत लगना।
कानूनी एवं व्यावहारिक चुनौतियाँ
• अधिकार क्षेत्र का मुद्दा: दूरसंचार और आईटी का नियमन केंद्र सरकार के अधीन है, जिससे राज्यों द्वारा लागू करने की क्षमता पर संदेह।
• कार्यान्वयन चिंताएँ:
• विशेषज्ञ राय: पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और अन्य का सुझाव है कि शिक्षा, जागरूकता और अभिभावकीय मार्गदर्शन विधायी प्रतिबंधों से अधिक टिकाऊ समाधान हैं।
विशेषज्ञों की राय
मुख्य निष्कर्ष
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