अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर फ्रॉड का भंडाफोड़: ₹450 करोड़ का संगठित साइबर नेटवर्क ध्वस्त

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अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर फ्रॉड का भंडाफोड़: ₹450 करोड़ का संगठित साइबर नेटवर्क ध्वस्त

यूरोपोल ने ₹450 करोड़ का कॉल सेंटर फ्रॉड नेटवर्क ध्वस्त कर दिया। साइबर अपराध अब जामतारा की झोपड़ियों या मेवात के बाजरे के खेतों तक सीमित नहीं रहा—यह अब एक संगठित उद्योग बन चुका है जो कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करता है। लगभग 450 लोग अलग-अलग विभागों (कस्टमर सर्विस, फाइनेंस, आईटी, एचआर, मैनेजमेंट) में काम कर रहे थे। टीमें अंग्रेज़ी, जर्मन, इटालियन, ग्रीक और स्पैनिश बोलने वाले पीड़ितों को निशाना बनाती थीं। एजेंटों को €800 प्रति माह बेसिक सैलरी मिलती थी और सफल धोखाधड़ी पर कमीशन भी दिया जाता था।

यूरोपोल ने अल्बानिया में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया, जिसने यूरोप और अन्य देशों में लगभग ₹450 करोड़ (50 मिलियन यूरो) की ठगी की थी। इस कार्रवाई में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में नकदी व उपकरण जब्त किए गए।

  • ऑपरेशन की तारीख: 17 अप्रैल 2026
  • संयुक्त कार्रवाई: यूरोपोल, यूरोजस्ट, ऑस्ट्रिया और अल्बानिया की पुलिस
  • गिरफ्तारी: 10 संदिग्ध तिराना (अल्बानिया) से पकड़े गए
  • जब्ती:
  • नकद: €891,735 (~₹8 करोड़)
  • उपकरण: 443 कंप्यूटर, 238 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप, कई स्टोरेज डिवाइस
  • धोखाधड़ी का पैमाना: यूरोप और अन्य देशों (इटली, जर्मनी, ग्रीस, स्पेन, कनाडा, यूके) में लगभग €50 मिलियन (~₹450 करोड़) की ठगी

धोखाधड़ी का तरीका

  • फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म: सोशल मीडिया विज्ञापनों और सर्च इंजन रिज़ल्ट्स के जरिए लोगों को नकली ट्रेडिंग साइट्स पर फंसाया गया।
  • कॉल सेंटर एजेंट: खुद को वित्तीय सलाहकार बताकर पीड़ितों को और पैसा लगाने के लिए राज़ी किया।
  • रिमोट एक्सेस: कई मामलों में स्कैमर्स ने पीड़ितों के डिवाइस पर नियंत्रण कर लिया।
  • रिकवरी फ्रॉड: जिन लोगों का पैसा डूब गया, उन्हें दोबारा निशाना बनाकर “पैसा वापस दिलाने” का झांसा दिया गया और उनसे €500 क्रिप्टोकरेंसी में जमा करने को कहा गया।

“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम से समानता: भारत में नकली पुलिस/CBI कॉल्स की तरह, यहां भी मनोवैज्ञानिक दबाव और पहचान की जालसाजी का इस्तेमाल हुआ।
विश्व स्तर पर ऐसे स्कैम रोकने के उपाय

अंतरराष्ट्रीय सहयोग:

  • यूरोपोल जैसी एजेंसियों का Joint Investigation Team (JIT) मॉडल अपनाकर इन नेटवर्क्स को खत्म किया जा सकता है।
  • देशों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और क्रॉस-बॉर्डर जांच को मजबूत करना होगा।

वित्तीय निगरानी:

  • बैंकों और भुगतान गेटवे को संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत अलर्ट जारी करना चाहिए।
  • क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर KYC और AML नियमों का सख्ती से पालन करवाना जरूरी है।

तकनीकी सुरक्षा:

  • सोशल मीडिया और सर्च इंजन को फर्जी निवेश विज्ञापनों पर रोक लगानी होगी।
  • रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर के दुरुपयोग पर निगरानी बढ़ानी चाहिए।

जन-जागरूकता:

  • नागरिकों को यह सिखाना कि अनजान कॉलर्स को कभी भी रिमोट एक्सेस न दें।
  • “पैसा वापस दिलाने” वाले ऑफर से सावधान रहें।
  • निवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म को आधिकारिक नियामक (जैसे SEBI, FCA, BaFin) से सत्यापित करें।

कानूनी ढांचा:

  • हर देश को साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए मुआवज़ा तंत्र बनाना चाहिए।
  • भारत में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पीड़ितों के लिए मुआवज़ा ढांचा बनाने का निर्देश दिया है—वैसा ही मॉडल अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है।

धोखाधड़ी अब स्थानीय नहीं रही, बल्कि वैश्विक उद्योग बन चुकी है। इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वित्तीय निगरानी, तकनीकी सुरक्षा, जन-जागरूकता और कानूनी ढांचे का एकीकृत प्रयास जरूरी है।