यूरोपोल ने ₹450 करोड़ का कॉल सेंटर फ्रॉड नेटवर्क ध्वस्त कर दिया। साइबर अपराध अब जामतारा की झोपड़ियों या मेवात के बाजरे के खेतों तक सीमित नहीं रहा—यह अब एक संगठित उद्योग बन चुका है जो कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करता है। लगभग 450 लोग अलग-अलग विभागों (कस्टमर सर्विस, फाइनेंस, आईटी, एचआर, मैनेजमेंट) में काम कर रहे थे। टीमें अंग्रेज़ी, जर्मन, इटालियन, ग्रीक और स्पैनिश बोलने वाले पीड़ितों को निशाना बनाती थीं। एजेंटों को €800 प्रति माह बेसिक सैलरी मिलती थी और सफल धोखाधड़ी पर कमीशन भी दिया जाता था।
यूरोपोल ने अल्बानिया में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया, जिसने यूरोप और अन्य देशों में लगभग ₹450 करोड़ (50 मिलियन यूरो) की ठगी की थी। इस कार्रवाई में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में नकदी व उपकरण जब्त किए गए।
धोखाधड़ी का तरीका
“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम से समानता: भारत में नकली पुलिस/CBI कॉल्स की तरह, यहां भी मनोवैज्ञानिक दबाव और पहचान की जालसाजी का इस्तेमाल हुआ।
विश्व स्तर पर ऐसे स्कैम रोकने के उपाय
अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
वित्तीय निगरानी:
तकनीकी सुरक्षा:
जन-जागरूकता:
कानूनी ढांचा:
धोखाधड़ी अब स्थानीय नहीं रही, बल्कि वैश्विक उद्योग बन चुकी है। इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वित्तीय निगरानी, तकनीकी सुरक्षा, जन-जागरूकता और कानूनी ढांचे का एकीकृत प्रयास जरूरी है।
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