Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत DoT का नया प्रावधान है, जिसमें सभी मैसेजिंग और कम्युनिकेशन ऐप्स को उपयोगकर्ता के रजिस्ट्रेशन के समय इस्तेमाल किए गए SIM से लगातार जुड़ा रहना अनिवार्य किया गया है।
यदि SIM हट जाती है, निष्क्रिय होती है या बदल दी जाती है, तो ऐप तब तक काम नहीं करेगा जब तक उपयोगकर्ता पुनः प्रमाणीकरण न करे।
सरल शब्दों में:
SIM = एक भौतिक पहचान टोकन, जो सिद्ध करता है कि उपयोगकर्ता वास्तव में उसी मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ है।
भारत में निम्न साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे थे:
फ़िशिंग
डिजिटल अरेस्ट स्कैम
प्रतिरूपण (Impersonation) धोखाधड़ी
निवेश धोखाधड़ी
रिमोट एक्सेस टूल का दुरुपयोग
विदेश में बैठे गिरोहों द्वारा भारतीय नंबर का उपयोग
कई ऐप्स SIM हटाने के बाद भी चलते रहते थे, जिससे दुरुपयोग, गुमनामी और सीमा-पार संचालन संभव था। Mandatory SIM Binding इस खामी को बंद कर देती है।
सभी कम्युनिकेशन ऐप्स के लिए अनिवार्य SIM लिंकिंग
90 दिन का अनुपालन समय
वेब संस्करण में हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट
सभी भारतीय मोबाइल नंबर-आधारित ऐप्स पर लागू
UPI और बैंकिंग ऐप्स में यह पहले से मानक प्रथा है
SIM की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होने से गुमनाम और फर्जी अकाउंट बनाना कठिन।
प्रतिरूपण धोखाधड़ी में कमी
विदेशी गिरोहों के लिए भारतीय नंबरों का उपयोग सीमित
विदेश से संचालित आपराधिक कॉल-सेंटरों के लिए भारतीय अकाउंट चलाना लगभग असंभव।
Bulk SIM दुरुपयोग कठिन होने से बेहतर ट्रेसबिलिटी और कम स्पैम।
SIM बाइंडिंग + 6-घंटे का वेब लॉगआउट
लंबे रिमोट सत्र (sessions) समाप्त
विदेशी IP से लगातार उपयोग असंभव
भौतिक SIM उपस्थिति = मजबूत पहचान लिंकिंग
बेहतर इंटेलिजेंस कोरिलेशन और तेज़ जांच
अकाउंट हाईजैकिंग और पहचान दुरुपयोग में कमी
केवल वास्तविक उपयोगकर्ता ही अकाउंट चला सकेगा
ऐप्स को SIM उपस्थिति सत्यापित करनी होगी और आवश्यक होने पर पुनः प्रमाणीकरण लागू करना होगा।
पूरे सेक्टर में सुरक्षा मानक ऊँचे होंगे
बार-बार SIM बदलने वाले उपयोगकर्ता
डुअल SIM के तकनीकी पहलू
अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े उपयोगकर्ता
उद्योग की गोपनीयता संबंधी चिंताएँ
COAI का स्पष्टीकरण:
ऐप्स Wi-Fi पर सामान्य रूप से काम करेंगे
विदेशी SIM ब्लॉक नहीं होंगे
यात्रियों को कोई बाधा नहीं होगी
Mandatory SIM Binding एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक साइबर सुरक्षा सुधार है। यह:
साइबर अपराध नेटवर्क को कमजोर करेगा
प्रतिरूपण और डिजिटल अरेस्ट स्कैम कम करेगा
राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाएगा
नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाएगा
1.4 अरब भारतीयों के लिए एक अधिक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम सुनिश्चित करेगा
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