ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी ने UMID (Unidentified Deadbody, Missing Person, Identification Portal and Integrated Database Website) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य अज्ञात शवों की पहचान को सुगम बनाना है। यह भारत में इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
देशभर में हर साल लगभग 80-90 हजार अज्ञात शव मिलने के अनुमान हैं, जिनमें से बहुत कम की पहचान हो पाती है। इस पोर्टल और वेबसाइट से शवों की पहचान में मदद मिलेगी।
हर साल मिलने वाले लगभग 50 हजार अज्ञात शवों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया यह सिस्टम नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग पर्सन्स एंड यूआईडी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ रहेगा। इसके ज़रिए पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को भी पहचान प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
एम्स के अनुसार, इस वेबसाइट से आईडीएमएसआर और एनसीआरबी के डेटा का एकीकरण संभव होगा, जिससे जांच तेज़ और प्रभावी बनेगी।
UMID अज्ञात शवों का शारीरिक ब्यौरा, तस्वीरें और अन्य फॉरेंसिक डिटेल्स एकत्र कर डेटाबेस में दर्ज करता है।
इस जानकारी को एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित किया जाता है।
परिवार या स्थानीय प्रशासन के सदस्य या संबंधित जांच एजेंसियाँ, शवों की पहचान के लिए UMID पोर्टल पर जाकर विवरण देख सकते हैं। यदि कोई मेल मिलता है, तो पोस्टमॉर्टम और अन्य फॉरेंसिक जांचों के माध्यम से सत्यापन किया जाता है।
इस पोर्टल से देशभर के पुलिस थानों, अस्पतालों और फॉरेंसिक विभागों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे अज्ञात शवों की पहचान की प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी बन सकेगी।
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