आईटी नियम (2026 संशोधन) में सुधार : साइबर अपराध रोकथाम की दिशा में सशक्त पहल

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आईटी नियम (2026 संशोधन) में सुधार : साइबर अपराध रोकथाम की दिशा में सशक्त पहल

1. आईटी नियम (2026) में प्रमुख सुधार

2026 में आईटी नियमों (2021) में किए गए संशोधन ने एआई-जनित कंटेंट और डीपफेक पर सख्त प्रावधान लागू किए हैं। मुख्य सुधार इस प्रकार हैं:

A. एआई पारदर्शिता और पहचान

  • “सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI)” की स्पष्ट परिभाषा दी गई है, जिसमें एआई या एल्गोरिदम से बनाए गए या बदले गए ऑडियो, वीडियो और चित्र शामिल हैं।
  • सभी सिंथेटिक कंटेंट पर अनिवार्य लेबलिंग और स्थायी मेटाडेटा जोड़ना आवश्यक होगा।

B. अनिवार्य खुलासा और उपयोगकर्ता घोषणा

  • प्लेटफ़ॉर्म को उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा करवानी होगी कि अपलोड किया गया कंटेंट एआई-जनित है या नहीं।
  • इससे नकली या भ्रामक सामग्री को असली दिखाकर फैलाने की संभावना कम होगी।

C. त्वरित प्रवर्तन समयसीमा

  • संवेदनशील कंटेंट (गैर-सहमति वाली निजी सामग्री) हटाना: 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे।
  • गैर-कानूनी कंटेंट हटाना: 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे।
  • शिकायत निवारण: 15 दिन से घटाकर 7 दिन।


2. साइबर अपराध रोकथाम में लाभ

A. हानिकारक कंटेंट का त्वरित नियंत्रण

  • 3 घंटे की समयसीमा से डीपफेक, धोखाधड़ी और मानहानि संबंधी सामग्री जल्दी हटाई जा सकेगी।
  • पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी और मानसिक व सामाजिक नुकसान कम होगा।

B. प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही

  • सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पहचान, लेबलिंग और हटाने की जिम्मेदारी तय की गई है।
  • इससे धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और गलत सूचना फैलाने की संभावना घटेगी।

C. साइबर अपराधियों पर रोकथाम

  • यह जानते हुए कि एआई-जनित कंटेंट तुरंत चिन्हित और हटाया जाएगा, अपराधियों का प्रेरणा स्रोत कमजोर होगा।
  • डीपफेक का उपयोग कर ब्लैकमेल, फ़िशिंग या राजनीतिक दुष्प्रचार करना कठिन होगा।

D. उपयोगकर्ता विश्वास और सुरक्षा

  • नागरिकों को भरोसा होगा कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म निगरानी और नियमन में हैं।
  • एआई कंटेंट की पारदर्शी लेबलिंग से धोखाधड़ी और फेक न्यूज़ से बचाव होगा।

E. कानूनी और संस्थागत मजबूती

  • त्वरित शिकायत निवारण से न्याय वितरण प्रणाली मजबूत होगी।
  • मेटाडेटा से कंटेंट ट्रेस करने योग्य होगा, जिससे जांच और अभियोजन आसान होगा।


3. साइबर अपराध नियंत्रण पर रणनीतिक प्रभाव

  • रोकथाम: अनिवार्य लेबलिंग से फर्जी पहचान और गलत सूचना कम होगी।
  • संरक्षण: पीड़ितों को जल्दी सहायता मिलेगी।
  • अभियोजन: मेटाडेटा और प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही से सबूत मजबूत होंगे।
  • नीतिगत नेतृत्व: भारत एआई नियमन में वैश्विक मानक स्थापित करेगा।


निष्कर्ष

आईटी नियमों (2026 संशोधन) ने साइबर शासन में नई दिशा दी है। गति, पारदर्शिता और जवाबदेही लागू कर भारत ने डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया दुरुपयोग और साइबर अपराध के खिलाफ अपनी रक्षा को मजबूत किया है। ये कदम न केवल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता को भी बढ़ाते हैं, जिससे भारत जिम्मेदार एआई नियमन में अग्रणी बनता है।